जो इंसान बिना दवाओं के मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ है , वही मस्त है और वही जबर्दस्त भी है। वैसे , सामान्य सेहत को ठीक बनाए रखने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है। इसके लिए बस खानपान और एक्सर्साइज का ध्यान रखना है। कैसे-?
कराएं चेकअप
स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी चीज जो है , वह यह कि आपको अपनी सेहत से जुड़ी जानकारी होनी चाहिए। सेहत की न्यूनतम जांच कराना बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको चार चीजों का पता होना ही चाहिए। ये चार चीजें हैं:
- अपनी ऊंचाई और वजन का पता करें। इससे आपको यह पता चलेगा कि आप ओवरवेट तो नहीं है।
- कॉलेस्ट्रॉल चेक कराएं और देखें कि कहीं यह सामान्य से ज्यादा तो नहीं है।
- ब्लड प्रेशर चेक कराएं और देखें कि यह हाई तो नहीं है।
- शुगर चेक कराएं।
ये चारों चीजें ऐसी हैं , जिनके लक्षण शुरू में दिखाई नहीं देते। अगर सब ठीक है तो अच्छी बात है , लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आगे भी ये दिक्कतें नहीं होंगी। थोड़े-थोड़े समय के बाद ये चेकअप दोबारा कराते रहना जरूरी है। एक 30 से 35 साल के स्वस्थ व्यक्ति को पांच साल में एक बार कॉलेस्ट्रॉल और हर तीन साल में शुगर का चेकअप कराते रहना चाहिए। बीपी हर छह महीने में एक बार चेक कराएं। 40 से ज्यादा उम्र हो जाए तो ये सभी टेस्ट थोड़े और जल्दी-जल्दी कराने चाहिए। अगर टेस्ट में कुछ दिक्कत है तो अपने डॉक्टर की सलाह से चलें। अगर सभी टेस्ट नॉर्मल आते हैं तो आपको दो चीजों की ओर ध्यान देना चाहिए। ये दो चीजें हैं: खानपान या डाइट और फिजिकल एक्सर्साइज।
कैसा हो खानपान
खानपान में एक सूत्र हमेशा ध्यान रखें। नाश्ता राजाओं की तरह करें , दोपहर का भोजन आम आदमी की तरह करें और रात का खाना भिखारियों की तरह खाएं। यानी ब्रेकफास्ट भरपेट करना है , लंच हल्का करना है और डिनर बहुत हल्का।
क्या न खाएं
- ब्रेकफास्ट के साथ चाय न पिएं। अगर पीनी ही है तो ब्रेकफास्ट के एक घंटे बाद ले लें। दिन में दो से तीन कप चाय ठीक है। इससे ज्यादा न लें।
- आपके खानपान में नॉनवेज ज्यादा नहीं होना चाहिए।
- ऑर्गन मीट , यानी कलेजी , से पूरी तरह परहेज करें। रेड मीट में फैट ज्यादा होता है इसलिए कभी-कभार ही लें और जब लें तो चर्बी उतारकर लें।
- चाहें तो अंडा ले सकते हैं। हफ्ते में दो या तीन एग येलो ले सकते हैं। इससे ज्यादा ले रहे हैं तो पूरा अंडा न लें। एग वाइट ही लें।
- रिफाइंड या प्रोसेस्ड चीजें न खाएं। मसलन कार्बोहाइड्रेट में आटा और मोटा चावल नैचरल और अनप्रोसेस्ड हैं , जबकि कॉर्न फ्लेक्स अगर आप खाते हैं तो वह प्रोसेस्ड है। - इसी तरह नूडल्स , पिज्जा , बर्गर , नमकीन , बिस्किट और बाकी तमाम पैकेटबंद चीजें प्रोसेस्ड हैं। इनसे जितना हो सके , बचें।
- बहुत ठंडी चीजें न खाएं , न ही ठंडा दूध पिएं।
- मैदा और सूजी से बनी चीजों को भी अच्छा नहीं माना जाता। मसलन काठी रोल , उत्तपम , उपमा आदि। अगर इन चीजों को बिना घी के बनाया जाए तो कभी-कभी ले सकते हैं।
- फ्राइड फूड नहीं लें। वनस्पति घी की बनी कोई चीज नहीं लें।
- मिठाई कम-से-कम खाएं , वह भी घर की बनी। तली हुई मिठाई जैसे जलेबी , इमरती , गुलाबजामुन आदि से बचें। बर्फी , छैना मिठाई ठीक हैं। मिठाई और नमकीन घर पर ही बनी हों , तो ही ठीक है।
- शराब न पिएं। अगर पीनी ही है तो एक दिन में 60 एमएल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
- स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन जहर है। इनसे बचें।
1. ब्रेकफास्ट
ब्रेकफास्ट से करीब 10 से 12 घंटे पहले हमने कुछ खाया होता है। यानी 10 से 12 घंटे का फास्ट हो जाता है। ऐसे में सुबह शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है जिसके लिए खाना जरूरी है।
कब करें
- उठने के बाद जितना जल्दी हो , ब्रेकफास्ट कर लें।
- मोटे तौर पर उठने के डेढ़ से दो घंटे के अंदर ब्रेकफास्ट कर लेना चाहिए।
- शुगर के मरीजों को फ्रेश होते ही कुछ खा लेना चाहिए।
- एक्सर्साइज करने के करीब पौने घंटे बाद ब्रेकफास्ट करना चाहिए।
ब्रेकफास्ट के कुछ अच्छे ऑप्शन
- गेहूं के आटे के साथ सोयाबीन , रागी या जई का आटा मिलाकर इसकी रोटियां बनाएं। इसमें दाल या पत्तेदार सब्जियों की स्टफिंग कर लें। परांठा बनाना है तो बहुत ही हल्का घी लगाएं , नहीं तो रोटी बेस्ट है। इसके साथ चटनी और छाछ ले सकते हैं। छाछ पसंद नहीं है तो रोटी खा लेने के बाद दूध ले सकते हैं। दूध बिल्कुल फैट फ्री न हो , टोंड दूध बेस्ट है।
- बाजरे , जई , चौलाई या गेहूं का दलिया पानी में बना लें। उसमें दूध मिलाकर ले लें। नमकीन दलिया भी बना सकते हैं , जिसमें पत्तेदार सब्जियां डाली जा सकती हैं।
- सैंडविच बनाने के लिए मल्टिग्रेन ब्रेड और खूब सारी ताजा सब्जी लें। होल वीट या मल्टिग्रेन बेड में ताजा सब्जी या पनीर की स्टफिंग से बना सैंडविच बढ़िया है। साथ में दूध ले सकते हैं।
- बेसन या मूंग की दाल का चीला ले सकते हैं। चीले पर घी बहुत हलका लगाएं। इसके साथ दही या छाछ का प्रयोग करें।
- स्प्राउट्स या अंकुरित अनाज और दालों की चाट बनाकर खाएं। स्प्राउट्स को मल्टिग्रेन या होल वीट ब्रेड के अंदर भरकर सैंडविच भी बना सकते हैं।
- पोहा या उपमा में अगर सब्जियां मिला ली जाएं तो यह पौष्टिक हो जाता है। साथ में छाछ या दही ले सकते हैं।
2. लंच
- लंच में परंपरागत भारतीय भोजन ठीक रहता है क्योंकि उससे सभी प्रमुख ग्रुप कवर हो जाते हैं।
- लंच में एक छोटी प्लेट सलाद , चपाती (गेहूं , जई , चना आदि के मिक्स्ड आटे से बनी) , एक कटोरी दाल और एक कटोरी दही ले सकते हैं। अगर चावल लेना चाहते हैं तो वे एक्स्ट्रा न हों। यानी चावल लेने हैं तो रोटी कम खाएं। इससे अनाज , सब्जी और दूध तीनों प्रमुख हिस्से कवर हो जाते हैं।
- खाने के बाद कोई एक पीस फ्रूट ले लें। खाने के बाद एक डली गुड़ खा लें।
3. शाम को स्नैक्स
- शाम को पांच बजे के आसपास हलके स्नैक्स लेने जरूरी हैं। उस वक्त शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है।
- ये स्नैक्स पैकेटबंद न हों। बिस्किट , नमकीन , चिप्स , समोसा , पकोड़ी आदि चीजों से बचें।
- इस वक्त आप भुने चने और गुड़ ले सकते हैं , सीजन है तो शकरकंदी ले सकते हैं , कॉर्न ले सकते हैं या फल भी लिए जा सकते हैं। सुबह नाश्ते में स्प्राउट्स नहीं लिए हैं , तो इस वक्त स्प्राउट्स भी लिए जा सकते हैं।
- एक मुट्ठी सूखे मेवे भी ले सकते हैं।
4. डिनर
- डिनर लगभग वैसा ही होगा , जैसा लंच , लेकिन लंच के मुकाबले मात्रा कम रखें।
- सोया बड़ी , परवल , करेला , लौकी या दूसरी पत्तेदार सब्जियों के साथ चपाती खाएं। कच्ची चीजों या सलाद को खाने का अंग बनाएं।
- डिनर के बाद अगर मीठा खाने का मन करता है तो कोई हलका मीठा ले सकते हैं , जैसे एक पीस चॉकलेट , खीर या मिठाई का पीस , गुड़।
- दही , चावल और मूली का प्रयोग रात के वक्त करने से बच सकें तो अच्छा है।
जरूरी है एक्सर्साइज/योग
एक्सर्साइज
- एक्सर्सारइज करते हैं तो ठीक है। नहीं करते , तो शुरू करें।
- ओवरवेट लोग ज्यादा उछलकूद वाली एक्सर्साइज न करें।
- कोई भी एक्सर्साइज , वॉक या टेडमिल पर वॉक सही है , लेकिन यह शूज पहनकर ही करें। इससे घुटने बेकार नहीं होंगे।
- एक्सर्साइज हफ्ते में कम-से-कम पांच दिन जरूर करें। सातों दिन करें तो और अच्छा है।
- एक्सर्साइज थोड़ी मुश्किल होनी चाहिए। बिल्कुल आसान या बहुत कठिन एक्सर्साइज करने से कोई फायदा नहीं है। इसके लिए नियम यह है कि अपनी क्षमता का 60 से 80 पर्सेंट तक इस्तेमाल करें।
- दो तरह की एक्सर्साइज होती हैं: ऐरोबिक और इक्विपमेंट के साथ। इक्विपमेंट के साथ या जिम करते समय ध्यान रखें कि हेवी वेट नहीं करना है।
- ब्रिस्क वॉक बहुत अच्छी है। सुबह के वक्त रोज करें। शुरू में धीरे-धीरे करें और फिर उसे बढ़ाकर 6 किमी प्रति घंटा तक ले जाएं। 15 मिनट रोजाना कर लें। घुटनों में दर्द हो तो न करें।
- लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दें और सीढ़ियों से जाएं और आएं। ध्यान रहे कि सीढ़ियां उतरने और चढ़ने दोनों में इस्तेमाल करनी है।
योग
- योग के लिए 45 मिनट का समय निकालें। जिसमें 15 मिनट तक खुली हवा में टहलें और फिर 30 मिनट का योग कर लें। इस 30 मिनट में ये क्रियाएं इसी क्रम में कर सकते हैं: कपालभाति , अग्निसार क्रिया , ताड़ासन , तीन राउंड सूर्य नमस्कार , लेटकर उत्तानपादासन , मर्कटासन , पवनमुक्तासन , भुजंगासन , बैठकर मंडूकासन , अनुलोम विलोम प्राणायाम , भस्त्रिका , भ्रामरी। इसके बाद थोड़ी देर शवासन।
- ऑफिस में काम के दौरान कुछ समय निकालें और ये क्रियाएं रोजाना करें: हाथों की सूक्ष्म क्रियाएं , गर्दन की सूक्ष्म क्रियाएं , कमर की घुमाने की एक्सर्साइज , आंखों की सूक्ष्म क्रियाएं।
- डिनर के बाद 15 मिनट टहल लें।
योग या एक्सर्साइज या दोनों ?
- अगर जिम जाना चाहते हैं या ऐरोबिक एक्सर्साइज करना चाहते हैं या कोई और एक्सर्साइज शेड्यूल है तो योग और इस एक्सर्सारइज को सुबह-शाम में बांट लें। सुबह योग कर लें और शाम को जिम या एक्सर्साइज कर सकते हैं। अगर वक्त है और सुबह के ही वक्त जिम और योग दोनों करना चाहते हैं तो आपको पहले जिम/एक्सर्साइज और बाद में योग करना चाहिए।
- डॉक्टरों का कहना है कि योग से भी ज्यादा जरूरी एक्सर्साइज है। आयुर्वेद भी एक्सर्साइज , यानी सूर्य नमस्कार , को करने की सलाह देता है यानी एक्सर्साइज जरूर करनी है , उसके बाद समय मिले तो योग भी करें।
स्ट्रेस करें कंट्रोल
सेहतमंद रहने के लिए तनावमुक्त रहना बेहद जरूरी है। जरूरत से ज्यादा तनाव अपने आप में एक बीमारी है। ऐसे में या तो स्ट्रेस देने वाली स्थिति को बदल डालें और या फिर उस स्थिति पर रिऐक्ट करने का अपना तरीका बदल दें। इसके लिए चार तरीके हैं। देखिए , आपको कौन-सा सूट करता है और फिर उसे ट्राई कीजिए।
- स्ट्रेस देने वाली चीजों को अवॉइड करें: जो लोग आपकी जिंदगी में स्ट्रेस की वजह हैं , उन्हें अवॉइड करें। अगर किसी खास विषय पर किसी खास आदमी के साथ आपकी बहसबाजी हो जाती है तो उस विषय के आते ही खुद वहां से हट जाएं। कोशिश कीजिए कि वे मुद्दे आपके डिस्कशन का हिस्सा न बनने पाएं।
- अवॉइड नहीं , तो तरीका बदलिए: अगर कुछ भी आपको परेशान कर रहा है तो मन में न घुटें। सही तरीके से अपनी बात रखें , नहीं तो गुस्सा मन में इकट्ठा होता जाएगा। दूसरों को बदलने की कोशिश करने से पहले खुद को भी थोड़ा बदलें। जिंदगी में हार न मानें। समस्या है तो उसे हल करने के लिए उससे आमने-सामने भिड़ें।
- स्थिति नहीं बदली , खुद को बदल लें: समस्या को देखने के अपने नजरिए में बदलाव लाएं। ट्रैफिक जाम में फंसे हैं तो परेशान होने के बजाय कोई अच्छी-सी किताब पढ़ें , अपना फेवरिट म्यूजिक सुनें या लोगों से बातचीत करें। समस्या को विस्तृत नजरिए से देखें। सोचें कि यह समस्या कितने दिन रहेगी ? दो दिन ? एक महीना ? दो महीना ? या फिर एक साल ? आखिरकार उसे खत्म होना ही है। अपने जीवन से ' हमेशा ', ' कभी नहीं ', ' यही होना चाहिए ' जैसे शब्दों को निकाल फेंके।
- बदल नहीं सकते , तो स्वीकार कीजिए: किसी प्रिय की मौत हो जाना , गंभीर बीमारी हो जाना , नौकरी छूट जाना या बिजनेस में घाटा हो जाना ऐसी समस्याएं जिन पर किसी का कोई जोर नहीं। ऐसी चीजों को जितनी जल्दी हो सके , स्वीकार कर लें। दूसरों का बर्ताव आपके काबू से बाहर की चीज है , इसलिए उसे बदलने की कोशिश करने की जगह उस पर रिऐक्ट करने का तरीका बदल डालें। कोई एक ऐसा शख्स जीवन में शामिल करें , जिससे आप मन की बात खुलकर कह सकें।
- और सबसे बड़ी बात , अगर सब कुछ ठीक चल रहा है , सेविंग हो रही है और जरूरी खर्च पूरे हो रहे हैं तो जरूरत से ज्यादा पैसे के पीछे न भागें। बादशाह बनने की कोशिश न करें और जिंदगी में सुकून लाएं।
कैसी हो दिनचर्या
हर इंसान के काम का शिड्यूल अलग-अलग होता है इसलिए सभी के लिए एक जैसी दिनचर्या नहीं हो सकती , लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक एक आदर्श दिनचर्या यह हो सकती है।
सुबह 6 बजे
- नींद से जागें। उठते ही एक गिलास पानी पिएं। यह पानी रात को तांबे के बर्तन में रखा हुआ हो तो और अच्छा है। ताजे पानी में नीबू और शहद मिलाकर भी ले सकते हैं।
- फ्रेश हों , स्नान करें और उसके बाद अपनी सुविधा के मुताबिक योग/एक्सर्साइज करें। हफ्ते में एक दिन वक्त निकालकर नहाने से पहले शरीर की तिल के तेल , सरसों के तेल या नारियल तेल से मालिश कर लें। उसके आधा घंटा बाद नहाएं। सदिर्यों में तेल को गुनगुना कर सकते हैं।
सुबह 8 बजे
- ब्रेकफास्ट करें।
- मेट्रो से ऑफिस जाते हैं तो एस्कलेटर्स का प्रयोग करें। ऑफिस पहुंचने में भी लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। चढ़ना और उतरना दोनों सीढ़ियों से होने चाहिए। ऑफिस में फोन का प्रयोग कम करें। किसी के पास जाना है तो खुद उठकर जाएं। चाय के लिए कैंटीन खुद जाएं। पानी खुद भरकर लाएं। इससे हलका श्रम होता रहेगा।
सुबह 11 बजे
- अगर इच्छा है तो कुछ हलका-फुलका ले सकते हैं। अगर सुबह चाय नहीं ले सके हैं तो इस वक्त चाय पी सकते हैं।
- ऑफिस में दो घंटे से ज्यादा लगातार न बैठे रहें। हर दो घंटे में थोड़ी चहलकदमी करें और आंखों को आराम दें।
दोपहर 1 बजे
- लंच करें। पानी लंच से एक घंटा पहले पी लें या लंच करने के एक घंटे बाद लें।
शाम 5 बजे
- ऑफिस में ही गर्दन , आंखों और कमर की सूक्ष्म क्रियाएं कर लें।
- इस वक्त तक आते-आते एनर्जी लेवल कम होने लगता है। इसलिए इस वक्त कुछ हलका-फुलका ले लें। चाय ली जा सकती है।
शाम 7 बजे
- ऑफिस से सीधे घर। रास्ते में मॉल , मस्ती आदि कुछ नहीं।
- घर आकर थोड़ा आराम। इच्छा हो तो थोड़ी ब्रिस्क वॉक कर सकते हैं।
रात 9-9:30 बजे
- डिनर। खाना खाते हुए टीवी न देखें।
- डिनर के बाद 15 मिनट के लिए टहल लें।
रात 10-11 बजे
- बिस्तर पर जाएं।
- ईश्वर का धन्यवाद करें। कोई अच्छी किताब पढ़ सकते हैं और सो जाएं।
लहसुन की एक कली और पांच नीम की पत्ती सुबह खाली पेट रोजाना लें। लहसुन रक्त को पतला बनाता है और ब्लडप्रेशर को सही रखती है। नहाने से पहले अपने शरीर की मालिश तिल के तेल से करें। इससे शरीर में रक्त संचार ठीक बना रहता है।
अनार का जूस कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक है। लौकी का जूस वजन कम करता है।
कराएं चेकअप
स्वस्थ रहने के लिए सबसे जरूरी चीज जो है , वह यह कि आपको अपनी सेहत से जुड़ी जानकारी होनी चाहिए। सेहत की न्यूनतम जांच कराना बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको चार चीजों का पता होना ही चाहिए। ये चार चीजें हैं:
- अपनी ऊंचाई और वजन का पता करें। इससे आपको यह पता चलेगा कि आप ओवरवेट तो नहीं है।
- कॉलेस्ट्रॉल चेक कराएं और देखें कि कहीं यह सामान्य से ज्यादा तो नहीं है।
- ब्लड प्रेशर चेक कराएं और देखें कि यह हाई तो नहीं है।
- शुगर चेक कराएं।
ये चारों चीजें ऐसी हैं , जिनके लक्षण शुरू में दिखाई नहीं देते। अगर सब ठीक है तो अच्छी बात है , लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आगे भी ये दिक्कतें नहीं होंगी। थोड़े-थोड़े समय के बाद ये चेकअप दोबारा कराते रहना जरूरी है। एक 30 से 35 साल के स्वस्थ व्यक्ति को पांच साल में एक बार कॉलेस्ट्रॉल और हर तीन साल में शुगर का चेकअप कराते रहना चाहिए। बीपी हर छह महीने में एक बार चेक कराएं। 40 से ज्यादा उम्र हो जाए तो ये सभी टेस्ट थोड़े और जल्दी-जल्दी कराने चाहिए। अगर टेस्ट में कुछ दिक्कत है तो अपने डॉक्टर की सलाह से चलें। अगर सभी टेस्ट नॉर्मल आते हैं तो आपको दो चीजों की ओर ध्यान देना चाहिए। ये दो चीजें हैं: खानपान या डाइट और फिजिकल एक्सर्साइज।
कैसा हो खानपान
खानपान में एक सूत्र हमेशा ध्यान रखें। नाश्ता राजाओं की तरह करें , दोपहर का भोजन आम आदमी की तरह करें और रात का खाना भिखारियों की तरह खाएं। यानी ब्रेकफास्ट भरपेट करना है , लंच हल्का करना है और डिनर बहुत हल्का।
क्या न खाएं
- ब्रेकफास्ट के साथ चाय न पिएं। अगर पीनी ही है तो ब्रेकफास्ट के एक घंटे बाद ले लें। दिन में दो से तीन कप चाय ठीक है। इससे ज्यादा न लें।
- आपके खानपान में नॉनवेज ज्यादा नहीं होना चाहिए।
- ऑर्गन मीट , यानी कलेजी , से पूरी तरह परहेज करें। रेड मीट में फैट ज्यादा होता है इसलिए कभी-कभार ही लें और जब लें तो चर्बी उतारकर लें।
- चाहें तो अंडा ले सकते हैं। हफ्ते में दो या तीन एग येलो ले सकते हैं। इससे ज्यादा ले रहे हैं तो पूरा अंडा न लें। एग वाइट ही लें।
- रिफाइंड या प्रोसेस्ड चीजें न खाएं। मसलन कार्बोहाइड्रेट में आटा और मोटा चावल नैचरल और अनप्रोसेस्ड हैं , जबकि कॉर्न फ्लेक्स अगर आप खाते हैं तो वह प्रोसेस्ड है। - इसी तरह नूडल्स , पिज्जा , बर्गर , नमकीन , बिस्किट और बाकी तमाम पैकेटबंद चीजें प्रोसेस्ड हैं। इनसे जितना हो सके , बचें।
- बहुत ठंडी चीजें न खाएं , न ही ठंडा दूध पिएं।
- मैदा और सूजी से बनी चीजों को भी अच्छा नहीं माना जाता। मसलन काठी रोल , उत्तपम , उपमा आदि। अगर इन चीजों को बिना घी के बनाया जाए तो कभी-कभी ले सकते हैं।
- फ्राइड फूड नहीं लें। वनस्पति घी की बनी कोई चीज नहीं लें।
- मिठाई कम-से-कम खाएं , वह भी घर की बनी। तली हुई मिठाई जैसे जलेबी , इमरती , गुलाबजामुन आदि से बचें। बर्फी , छैना मिठाई ठीक हैं। मिठाई और नमकीन घर पर ही बनी हों , तो ही ठीक है।
- शराब न पिएं। अगर पीनी ही है तो एक दिन में 60 एमएल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
- स्मोकिंग और तंबाकू का सेवन जहर है। इनसे बचें।
1. ब्रेकफास्ट
ब्रेकफास्ट से करीब 10 से 12 घंटे पहले हमने कुछ खाया होता है। यानी 10 से 12 घंटे का फास्ट हो जाता है। ऐसे में सुबह शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है जिसके लिए खाना जरूरी है।
कब करें
- उठने के बाद जितना जल्दी हो , ब्रेकफास्ट कर लें।
- मोटे तौर पर उठने के डेढ़ से दो घंटे के अंदर ब्रेकफास्ट कर लेना चाहिए।
- शुगर के मरीजों को फ्रेश होते ही कुछ खा लेना चाहिए।
- एक्सर्साइज करने के करीब पौने घंटे बाद ब्रेकफास्ट करना चाहिए।
ब्रेकफास्ट के कुछ अच्छे ऑप्शन
- गेहूं के आटे के साथ सोयाबीन , रागी या जई का आटा मिलाकर इसकी रोटियां बनाएं। इसमें दाल या पत्तेदार सब्जियों की स्टफिंग कर लें। परांठा बनाना है तो बहुत ही हल्का घी लगाएं , नहीं तो रोटी बेस्ट है। इसके साथ चटनी और छाछ ले सकते हैं। छाछ पसंद नहीं है तो रोटी खा लेने के बाद दूध ले सकते हैं। दूध बिल्कुल फैट फ्री न हो , टोंड दूध बेस्ट है।
- बाजरे , जई , चौलाई या गेहूं का दलिया पानी में बना लें। उसमें दूध मिलाकर ले लें। नमकीन दलिया भी बना सकते हैं , जिसमें पत्तेदार सब्जियां डाली जा सकती हैं।
- सैंडविच बनाने के लिए मल्टिग्रेन ब्रेड और खूब सारी ताजा सब्जी लें। होल वीट या मल्टिग्रेन बेड में ताजा सब्जी या पनीर की स्टफिंग से बना सैंडविच बढ़िया है। साथ में दूध ले सकते हैं।
- बेसन या मूंग की दाल का चीला ले सकते हैं। चीले पर घी बहुत हलका लगाएं। इसके साथ दही या छाछ का प्रयोग करें।
- स्प्राउट्स या अंकुरित अनाज और दालों की चाट बनाकर खाएं। स्प्राउट्स को मल्टिग्रेन या होल वीट ब्रेड के अंदर भरकर सैंडविच भी बना सकते हैं।
- पोहा या उपमा में अगर सब्जियां मिला ली जाएं तो यह पौष्टिक हो जाता है। साथ में छाछ या दही ले सकते हैं।
2. लंच
- लंच में परंपरागत भारतीय भोजन ठीक रहता है क्योंकि उससे सभी प्रमुख ग्रुप कवर हो जाते हैं।
- लंच में एक छोटी प्लेट सलाद , चपाती (गेहूं , जई , चना आदि के मिक्स्ड आटे से बनी) , एक कटोरी दाल और एक कटोरी दही ले सकते हैं। अगर चावल लेना चाहते हैं तो वे एक्स्ट्रा न हों। यानी चावल लेने हैं तो रोटी कम खाएं। इससे अनाज , सब्जी और दूध तीनों प्रमुख हिस्से कवर हो जाते हैं।
- खाने के बाद कोई एक पीस फ्रूट ले लें। खाने के बाद एक डली गुड़ खा लें।
3. शाम को स्नैक्स
- शाम को पांच बजे के आसपास हलके स्नैक्स लेने जरूरी हैं। उस वक्त शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है।
- ये स्नैक्स पैकेटबंद न हों। बिस्किट , नमकीन , चिप्स , समोसा , पकोड़ी आदि चीजों से बचें।
- इस वक्त आप भुने चने और गुड़ ले सकते हैं , सीजन है तो शकरकंदी ले सकते हैं , कॉर्न ले सकते हैं या फल भी लिए जा सकते हैं। सुबह नाश्ते में स्प्राउट्स नहीं लिए हैं , तो इस वक्त स्प्राउट्स भी लिए जा सकते हैं।
- एक मुट्ठी सूखे मेवे भी ले सकते हैं।
4. डिनर
- डिनर लगभग वैसा ही होगा , जैसा लंच , लेकिन लंच के मुकाबले मात्रा कम रखें।
- सोया बड़ी , परवल , करेला , लौकी या दूसरी पत्तेदार सब्जियों के साथ चपाती खाएं। कच्ची चीजों या सलाद को खाने का अंग बनाएं।
- डिनर के बाद अगर मीठा खाने का मन करता है तो कोई हलका मीठा ले सकते हैं , जैसे एक पीस चॉकलेट , खीर या मिठाई का पीस , गुड़।
- दही , चावल और मूली का प्रयोग रात के वक्त करने से बच सकें तो अच्छा है।
जरूरी है एक्सर्साइज/योग
एक्सर्साइज
- एक्सर्सारइज करते हैं तो ठीक है। नहीं करते , तो शुरू करें।
- ओवरवेट लोग ज्यादा उछलकूद वाली एक्सर्साइज न करें।
- कोई भी एक्सर्साइज , वॉक या टेडमिल पर वॉक सही है , लेकिन यह शूज पहनकर ही करें। इससे घुटने बेकार नहीं होंगे।
- एक्सर्साइज हफ्ते में कम-से-कम पांच दिन जरूर करें। सातों दिन करें तो और अच्छा है।
- एक्सर्साइज थोड़ी मुश्किल होनी चाहिए। बिल्कुल आसान या बहुत कठिन एक्सर्साइज करने से कोई फायदा नहीं है। इसके लिए नियम यह है कि अपनी क्षमता का 60 से 80 पर्सेंट तक इस्तेमाल करें।
- दो तरह की एक्सर्साइज होती हैं: ऐरोबिक और इक्विपमेंट के साथ। इक्विपमेंट के साथ या जिम करते समय ध्यान रखें कि हेवी वेट नहीं करना है।
- ब्रिस्क वॉक बहुत अच्छी है। सुबह के वक्त रोज करें। शुरू में धीरे-धीरे करें और फिर उसे बढ़ाकर 6 किमी प्रति घंटा तक ले जाएं। 15 मिनट रोजाना कर लें। घुटनों में दर्द हो तो न करें।
- लिफ्ट का प्रयोग बिल्कुल बंद कर दें और सीढ़ियों से जाएं और आएं। ध्यान रहे कि सीढ़ियां उतरने और चढ़ने दोनों में इस्तेमाल करनी है।
योग
- योग के लिए 45 मिनट का समय निकालें। जिसमें 15 मिनट तक खुली हवा में टहलें और फिर 30 मिनट का योग कर लें। इस 30 मिनट में ये क्रियाएं इसी क्रम में कर सकते हैं: कपालभाति , अग्निसार क्रिया , ताड़ासन , तीन राउंड सूर्य नमस्कार , लेटकर उत्तानपादासन , मर्कटासन , पवनमुक्तासन , भुजंगासन , बैठकर मंडूकासन , अनुलोम विलोम प्राणायाम , भस्त्रिका , भ्रामरी। इसके बाद थोड़ी देर शवासन।
- ऑफिस में काम के दौरान कुछ समय निकालें और ये क्रियाएं रोजाना करें: हाथों की सूक्ष्म क्रियाएं , गर्दन की सूक्ष्म क्रियाएं , कमर की घुमाने की एक्सर्साइज , आंखों की सूक्ष्म क्रियाएं।
- डिनर के बाद 15 मिनट टहल लें।
योग या एक्सर्साइज या दोनों ?
- अगर जिम जाना चाहते हैं या ऐरोबिक एक्सर्साइज करना चाहते हैं या कोई और एक्सर्साइज शेड्यूल है तो योग और इस एक्सर्सारइज को सुबह-शाम में बांट लें। सुबह योग कर लें और शाम को जिम या एक्सर्साइज कर सकते हैं। अगर वक्त है और सुबह के ही वक्त जिम और योग दोनों करना चाहते हैं तो आपको पहले जिम/एक्सर्साइज और बाद में योग करना चाहिए।
- डॉक्टरों का कहना है कि योग से भी ज्यादा जरूरी एक्सर्साइज है। आयुर्वेद भी एक्सर्साइज , यानी सूर्य नमस्कार , को करने की सलाह देता है यानी एक्सर्साइज जरूर करनी है , उसके बाद समय मिले तो योग भी करें।
स्ट्रेस करें कंट्रोल
सेहतमंद रहने के लिए तनावमुक्त रहना बेहद जरूरी है। जरूरत से ज्यादा तनाव अपने आप में एक बीमारी है। ऐसे में या तो स्ट्रेस देने वाली स्थिति को बदल डालें और या फिर उस स्थिति पर रिऐक्ट करने का अपना तरीका बदल दें। इसके लिए चार तरीके हैं। देखिए , आपको कौन-सा सूट करता है और फिर उसे ट्राई कीजिए।
- स्ट्रेस देने वाली चीजों को अवॉइड करें: जो लोग आपकी जिंदगी में स्ट्रेस की वजह हैं , उन्हें अवॉइड करें। अगर किसी खास विषय पर किसी खास आदमी के साथ आपकी बहसबाजी हो जाती है तो उस विषय के आते ही खुद वहां से हट जाएं। कोशिश कीजिए कि वे मुद्दे आपके डिस्कशन का हिस्सा न बनने पाएं।
- अवॉइड नहीं , तो तरीका बदलिए: अगर कुछ भी आपको परेशान कर रहा है तो मन में न घुटें। सही तरीके से अपनी बात रखें , नहीं तो गुस्सा मन में इकट्ठा होता जाएगा। दूसरों को बदलने की कोशिश करने से पहले खुद को भी थोड़ा बदलें। जिंदगी में हार न मानें। समस्या है तो उसे हल करने के लिए उससे आमने-सामने भिड़ें।
- स्थिति नहीं बदली , खुद को बदल लें: समस्या को देखने के अपने नजरिए में बदलाव लाएं। ट्रैफिक जाम में फंसे हैं तो परेशान होने के बजाय कोई अच्छी-सी किताब पढ़ें , अपना फेवरिट म्यूजिक सुनें या लोगों से बातचीत करें। समस्या को विस्तृत नजरिए से देखें। सोचें कि यह समस्या कितने दिन रहेगी ? दो दिन ? एक महीना ? दो महीना ? या फिर एक साल ? आखिरकार उसे खत्म होना ही है। अपने जीवन से ' हमेशा ', ' कभी नहीं ', ' यही होना चाहिए ' जैसे शब्दों को निकाल फेंके।
- बदल नहीं सकते , तो स्वीकार कीजिए: किसी प्रिय की मौत हो जाना , गंभीर बीमारी हो जाना , नौकरी छूट जाना या बिजनेस में घाटा हो जाना ऐसी समस्याएं जिन पर किसी का कोई जोर नहीं। ऐसी चीजों को जितनी जल्दी हो सके , स्वीकार कर लें। दूसरों का बर्ताव आपके काबू से बाहर की चीज है , इसलिए उसे बदलने की कोशिश करने की जगह उस पर रिऐक्ट करने का तरीका बदल डालें। कोई एक ऐसा शख्स जीवन में शामिल करें , जिससे आप मन की बात खुलकर कह सकें।
- और सबसे बड़ी बात , अगर सब कुछ ठीक चल रहा है , सेविंग हो रही है और जरूरी खर्च पूरे हो रहे हैं तो जरूरत से ज्यादा पैसे के पीछे न भागें। बादशाह बनने की कोशिश न करें और जिंदगी में सुकून लाएं।
कैसी हो दिनचर्या
हर इंसान के काम का शिड्यूल अलग-अलग होता है इसलिए सभी के लिए एक जैसी दिनचर्या नहीं हो सकती , लेकिन आयुर्वेद के मुताबिक एक आदर्श दिनचर्या यह हो सकती है।
सुबह 6 बजे
- नींद से जागें। उठते ही एक गिलास पानी पिएं। यह पानी रात को तांबे के बर्तन में रखा हुआ हो तो और अच्छा है। ताजे पानी में नीबू और शहद मिलाकर भी ले सकते हैं।
- फ्रेश हों , स्नान करें और उसके बाद अपनी सुविधा के मुताबिक योग/एक्सर्साइज करें। हफ्ते में एक दिन वक्त निकालकर नहाने से पहले शरीर की तिल के तेल , सरसों के तेल या नारियल तेल से मालिश कर लें। उसके आधा घंटा बाद नहाएं। सदिर्यों में तेल को गुनगुना कर सकते हैं।
सुबह 8 बजे
- ब्रेकफास्ट करें।
- मेट्रो से ऑफिस जाते हैं तो एस्कलेटर्स का प्रयोग करें। ऑफिस पहुंचने में भी लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। चढ़ना और उतरना दोनों सीढ़ियों से होने चाहिए। ऑफिस में फोन का प्रयोग कम करें। किसी के पास जाना है तो खुद उठकर जाएं। चाय के लिए कैंटीन खुद जाएं। पानी खुद भरकर लाएं। इससे हलका श्रम होता रहेगा।
सुबह 11 बजे
- अगर इच्छा है तो कुछ हलका-फुलका ले सकते हैं। अगर सुबह चाय नहीं ले सके हैं तो इस वक्त चाय पी सकते हैं।
- ऑफिस में दो घंटे से ज्यादा लगातार न बैठे रहें। हर दो घंटे में थोड़ी चहलकदमी करें और आंखों को आराम दें।
दोपहर 1 बजे
- लंच करें। पानी लंच से एक घंटा पहले पी लें या लंच करने के एक घंटे बाद लें।
शाम 5 बजे
- ऑफिस में ही गर्दन , आंखों और कमर की सूक्ष्म क्रियाएं कर लें।
- इस वक्त तक आते-आते एनर्जी लेवल कम होने लगता है। इसलिए इस वक्त कुछ हलका-फुलका ले लें। चाय ली जा सकती है।
शाम 7 बजे
- ऑफिस से सीधे घर। रास्ते में मॉल , मस्ती आदि कुछ नहीं।
- घर आकर थोड़ा आराम। इच्छा हो तो थोड़ी ब्रिस्क वॉक कर सकते हैं।
रात 9-9:30 बजे
- डिनर। खाना खाते हुए टीवी न देखें।
- डिनर के बाद 15 मिनट के लिए टहल लें।
रात 10-11 बजे
- बिस्तर पर जाएं।
- ईश्वर का धन्यवाद करें। कोई अच्छी किताब पढ़ सकते हैं और सो जाएं।
लहसुन की एक कली और पांच नीम की पत्ती सुबह खाली पेट रोजाना लें। लहसुन रक्त को पतला बनाता है और ब्लडप्रेशर को सही रखती है। नहाने से पहले अपने शरीर की मालिश तिल के तेल से करें। इससे शरीर में रक्त संचार ठीक बना रहता है।
अनार का जूस कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक है। लौकी का जूस वजन कम करता है।
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