Sunday, 28 October 2012

पति पत्नी के बीच समस्याएं


दांपत्य जीवन में बहुत से ऐसे कारण होते हैं जिससे रिलेशनशिप में मनमुटाव की स्थिति पैदा हो जाती है। वैवाहिक जीवन की जटिलता को समझना मुश्किल है लेकिन सुखी दांपत्य जीवन के उपाय जरूर किए जा सकते हैं। विवाह के बाद पति-पत्नी कई बार अचानक आई जिम्मेदारियों का बोझ उठा नहीं पाते नतीजन, रिलेशनशिप में दरार आने लगती है। आइए जानते है पति-पत्नी के बीच समस्याओं के बारे में।
  • विवाह के बाद कई बार पति-पत्नी में किन्हीं कारणों से एक-दूसरे पर अविश्वास की स्थिति आ जाती है, ऐसे में पति-पत्नीं समझौता किए बिना या फिर काउंसलर की सलाह लिए बिना तलाक के अंजाम तक भी पहुंच जाते हैं।
  • सुखी दांपत्य जीवन के उपायों के लिए जरूरी है कि पति-पत्नी एक-दूसरे के महत्व को समझे और एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करें।
  • आज  पति-पत्नी के बीच समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं जिससे पति-पत्नी के बीच में मनमुटाव होना, संबंधों में कड़वाहट उत्पन्न होना, सेक्स से संबंधित समस्या होना तथा एक-दूसरे की सोच न मिल पाना, वैवाहिक जीवन में जटिलता, रिलेशनशिप्स में दरार आने के सा‍मान्य कारण हैं।
  • कई बार रिलेशपशिप में दरार ,साथी से बहुत ज्यादा अपेक्षा करने से भी आ सकती है। आप अपने साथी से जितनी अधिक अपेक्षाएं रखेंगे आपके संबंधों में उतनी ही समस्याएं बढ़ती जाएंगी। इसीलिए बेहतर यही है कि आप अपने काम को स्वयं अंजाम दें।
  • वैवाहिक जीवन को सफल बनाने के लिए पति-पत्नी को अपने साथी के अनुकूल अपने आपको ढालना चाहिए या उसकी पसंद-नापंसद का भी खास ख्याल रखना जरूरी होता है।
  • कई बार वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी दोनों में से किसी को सेक्स की कमजोरी हो या कोई सेक्‍स समस्‍या हो और एक-दूसरे की इच्छाएं पूरी न कर पा रहे हो तो भी पति-पत्नी के बीच समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। आपका साथी उस समय तो चाहे कुछ न कहें लेकिन उसकी भड़ास, चिडचिड़ाहट और झल्लाहट बाद में दिखाई दे सकती हैं।
  • बहुत से दम्पत्तियों के जीवन में साथियों की सोच तथा कार्य में मेल न हो पाने या रूचियों में अंतर के कारण आपस में प्रेम नहीं पनप पाता, जिससे दोनों में एक-दूसरे के प्रति असंतोष की भावना होने लगती है। नतीजन रिलेशनशिप में दरार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
  • किसी एक साथी का अच्छी पोस्ट पर होने से भी रिश्तों में तनाव की समस्या पैदा हो जाती है यदि ऐसा होता है तो दोनों ही एक-दूसरे के कार्य से खुश नहीं होते और हर समय एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं।
  • पति-पत्नी के सामान्य संबंधों में हस्तक्षेप करना, पति-पत्नी के संबंधों में किसी दूसरे का दखल या सेक्स से संतुष्ट न होने के कारण से किसी दूसरे को चाहना आदि कारणों से भी मनमुटाव हो जाता है और वैवाहिक जीवन में जटिलताएं आनी आरंभ हो जाती हैं।
रिलेशनशिप में मनमुटाव न हो, दांपत्य जीवन सुखमय हो, वैवाहिक जीवन जटिल न हो इसके लिए जरूरी है कि पति-पत्नी को अपनी समस्याओं के बीच किसी तीसरे को हस्तक्षेप न करते हुए समस्याओं का समाधान खुद निकालने की कोशिश करें।

दस सामान्य सेक्स समस्याएं


आज के समय में तनाव भरी जीवनशैली के कारण सेक्स समस्याएं होना आम बात है। सेक्स के दौरान अचानक परेशान हो जाने से या कोई समस्या  होने से सेक्स लाइफ पर नकारात्मक असर पड़ना लाजमी है। सेक्स के दौरान कोई समस्या आने पर आपको अपने मन से कोई दवा नहीं लेनी चाहिए बल्कि डॉक्टर से या फिर सेक्स काउंसलर से कंसल्ट करना चाहिए। हाल ही में हुए सर्वे बताते हैं कि 18 से 59 वर्ष के पुरुषों और महिलाओं के बीच हुए सर्वे में 43% महिलाएं और 31% पुरुषों में कोई न कोई लैंगिक विकार पाये गये। यानी आज भारत में देखा जाए तो करीब दस करोड़ लोगों के सेक्स समस्या से पीडि़त होने की संभावना है। दरअसल, सेक्स समस्याएं लोगों के जागरूक न होने, समय पर डॉक्ट‍र को कंसल्ट न करने और काउंसलर को सभी बाते खुलकर न बताने के कारण बढ़ रही हैं। आइए जानें कौन-कौन सी सामान्य सेक्स समस्याएं हैं जिनसे लोग आमतौर पर पीडि़त होते हैं।

  1. पुरुष के लिंग में उत्तेजना न आना, उत्तेजना आकर शीघ्र ही खत्म हो जाना, उत्तेजना आते ही वीर्य निकल जाना आदि पुरूषों में आम सेक्स समस्याएं हैं।
  2. पुरूषों का स्त्री के सामने आते ही घबरा जाना, वीर्य निकल जाना इत्यादि भी सेक्स समस्याओं के अंतर्गत ही आता है। जिससे पुरूष स्त्री से दूर-दूर भागने लगते हैं और अपनी बीमारी को छिपाने की कोशिश करते हैं।
  3. पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं। ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं। वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु अल्पता को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं। जो की पुरूषों में होने वाली एक गंभीर सेक्स समस्या है।

  1. कई पुरूषों के वीर्य में शुक्राणुओं ही नहीं होते, इस स्थिति को एज़ूस्पर्मिया कहा जाता है। इस समस्या के होने पर पुरुष संतान पैदा करने योग्य नहीं होते हैं। यह भी परूषों के लिए एक गंभीर सेक्स समस्या है।
  2. पुरूषों में उम्र के बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन का स्तर कम हो जाता है और इसके कारण सेक्स इच्छा में कमी भी हो सकता है।
  3. महिलाओं को सबसे अधिक शिकायत यौनेच्छा की कमी होती है। कई महिलाओं की सेक्स करने में बिल्कुल भी रूचि नहीं होती, यानी उनकी सेक्स भावना बिल्कुल खत्म हो चुकी होती है जो कि एक गंभीर सेक्स समस्या है। कई बार ये स्थिति मेनोपोज के बाद आती है तो कई महिलाओं में मेनोपोज से पहले ही महिलाओं मे सेक्स के प्रति अनिच्छा हो जाती है।

  1. योनि से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होना आज युवावस्था की महिलाओं के लिए भी आम समस्या हो गई है। सामान्य भाषा में इसे सफेद पानी यानी ल्यूकोरिया कहा जाता है।
  2. कई कारणों से महिलाओं को योनि में खुजली होने लगती है। इसके कई कारण जैसे इन्फेक्शन होना,ठीक से सफाई न होना, रोजाना कब्ज रहना और संभोग करने वाले व्यक्ति के यौनांगों में इन्फेक्शन होना,रक्त विकार इत्यादि इसके प्रमुख कारण हैं।
  3. कई बार प्यूविक हेयर्स की ठीक से सफाई न करने के कारण उनमें स्थिति कीटाणु योनि मार्ग में प्रविष्ट होकर कई योनि गर्भाशय संबंधी समस्याओं को उत्पन्न कर सकते हैं। यौनांगों की इसीलिए ठीक तरह से सफाई होना बेहद आवश्यक है।
  4. कई बार स्तनों में दर्द होने पर लड़कियां इसे आम बीमारी समझ कर लापरवा‍ही बरतती है, लेकिन ये दर्द बढ़कर स्तन कैंसर का रूप भी ले सकता है। इसीलिए किसी भी तरह के बड़े खतरे को टालने के लिए जरूरी है डॉक्टर की सही समय पर सलाह लेना।

अलसी से सेक्स समस्याओं का उपचार


प्राकृतिक जड़ी बूटियों का शरीर को स्वस्थ रखने और तमाम गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण योगदान है। आज के समय में प्राकृतिक जड़ी बूटियों का बहुत महत्व है क्योंकि इनका इफेक्ट बहुत प्रभावशाली होता है और इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। अलसी एक ऐसी ही जड़ी बूटी है जो कि ओमेगा 3 फैटी एसिड  का महत्वपूर्ण स्रोत है। यह तो आप जानते ही हैं कि शरीर को चुस्त-दुरूस्त रखने में ओमेगा 3 फैटी एसिड का बहुत बड़ा योगदान है। लेकिन क्या आप जानते हैं अलसी यानी फ्लैक्सीड के जरिए तमाम तरह की सेक्स समस्याओं से निजात पाई जा सकती हैं। सवाल ये उठता है कि अलसी क्या है, अलसी का उपयोग कैसे किया जाता है और किस तरह अलसी से सेक्स समस्याओं का उपचार किया जा सकता है। आइए जानें अलसी से सेक्स समस्याओं के उपचार के बारे में कुछ और दिलचस्प बातें।


अलसी क्या है 



अलसी एक जड़ी बूटी है जिसमें लिनोलेनिक नामक एसिड पाया जाता है जो कि ओमेगा 3 फैटी एसिड का महत्वपूर्ण स्रोत है। इतना ही नहीं अलसी एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर औषधी है जो कि व्‍यक्ति को प्रोटेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से भी बचाती हैं।


अलसी का प्रयोग
  • पुरूषों को आमतौर पर बढ़ती उम्र में प्रोटेस्ट कैंसर हो जाता है जो कि सेक्स समस्याओं का मुख्य कारक है। प्रोटेस्ट कैंसर से ब्लैडर कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अलसी के सेवन से ना सिर्फ सेक्स समस्याओं से बचा जा सकता है बल्कि कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से भी बचा जा सकता है।
  • अलसी को चूर्ण, गोली के रूप में या फिर खाने के साथ मिक्स करके भी लिया जा सकता है। लेकिन अलसी का सेवन करने से पहले डॉक्टर्स से संपर्क करना और इसके सेवन के लिए सलाह लेना जरूरी है। खासतौर पर तब जब आप सेक्स समस्या‍ओं से निजात पाने के लिए इसका सेवन कर रहे हों।
  • हालांकि अलसी एक प्राकृतिक तत्व है लेकिन हर गुणकारी चीज के कुछ फायदे होते हैं तो उसके नुकसान भी होते हैं। इसीलिए अलसी के प्रयोग से आपको कोई साइड इफेक्ट ना हो इसके लिए डॉक्टर से बात करना जरूरी हो जाता है।
  • अलसी के सेवन से आप कुछ सेक्स समस्या्ओं जैसे जल्दी उत्तेजित होना या सेक्स के दौरान नर्वस होना, शारीरिक दुर्बलता होना, सेक्स में रूचि कम होना, बांझपन, बार-बार  गर्भपात होना, स्तनपान के दौरान दूध ना आना इत्यादि समस्याओं से रोजाना अलसी का सेवन करके निजात पा सकते हैं।


क्या कहते हैं शोध 


हाल ही में आए शोध में भी इस बात को पुख्ता किया गया कि अलसी यानी फ्लैक्सीड से आप तमाम गंभीर सेक्स समस्याओं से भी निजात पा सकते हैं। शोधों के मुताबिक, यदि किसी को कोई सेक्स समस्या होती है तो उसका मुख्य कारण पेल्विक की कोशिकाओं में रक्त का ठीक तरह से संचार ना होना। लेकिन जब आप इस समस्या के दौरान अलसी का प्रयोग करते हैं तो आपकी रक्त वाहिनियां खुल जाती हैं और धीरे-धीरे रक्त वाहिनियों में रक्त का संचार भी बढ़ जाता है। इतना ही नहीं शोधों में यह भी बता सामने आई है कि जिन लोगों की सेक्स में रूचि नहीं होती उनकी उत्तेजना बढ़ाने में अलसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दरअसल अलसी में कई गुणकारी तत्व मौजूद होते हैं इनमें से उत्तेजना बढ़ाने वाला एक तत्व एफरोडाइसियेक्स भी मौजूद होता है।

सेक्स समस्याओं के बारे में कैसे बात करें


यह तो सभी जानते हैं संबंधों में एक-दूसरे का साथ बेहद जरूरी है। पति-पत्नी के आपसी संबंधों में जहां शारीरिक संबंध जरूरी होते हैं वहीं मानसिक जुड़ाव भी बहुत जरूरी है। मानसिक जुड़ाव के साथ-साथ शारीरिक जुड़ाव संबंधों को अधिक मधुर बनाता है। एक तरफ जहां पति-पत्नी के संबंधों में सेक्स का बहुत महत्व है यही सेक्सा समस्याओं को भी इनसे अलग रखकर नहीं देखा जा सकता।

आमतौर पर पति-पत्नी सेक्स समस्याओं के बारे में बात करने से कतराते हैं, नतीजन सेक्स समस्या बढ़ती जाती है। ऐसे में पति और पत्नी दोनों में इतनी आपसी समझ होनी चाहिए कि एक-दूसरे से कोई भी बातें छुपाए बिना ना रह सकें। इतना ही नहीं इस मामले में महिलाएं कभी पहल नहीं करती। ऐसे में पुरूषों को चाहिए कि उनका व्यवहार ऐसा हो कि उनकी पत्नी उनसे हर बात शेयर कर सकें। आइए जानें सेक्स समस्याओं के बारे में कैसे बात करें।

  • जब भी महिलाओं को सेक्स समस्या होती है वह बताने से हिचकती है। सिर्फ महिलाएं ही नहीं पुरूषों के साथ भी ऐसी ही स्थिति होती है। ऐसे में समस्या बढ़ने की आशंका बराबर बनी रहती है।
  • यदि आप चाहते हैं कि कोई भी सेक्स समस्या है उसे आप अपने साथी से शेयर करें तो उसके लिए जरूरी है कि आपका अपने साथी को जानना कि उसकी आपकी इस समस्यास या परेशानी पर क्या प्रतिक्रिया होगी।
  • यदि आप अपने साथी से अपनी सारी बातें शेयर करते हैं तो आपको चाहिए कि आप अपने साथी से उन बातों को शेयर करने में भी सहज रहें जो आपने अब तक नहीं की है।

सेक्स समस्याओं के बारे में बातचीत के लिए उपाय कुछ उपाय

विश्वास जीते- यदि आप चाहते हैं कि आप अपने साथी से सभी समस्याओं खासकर सेक्स समस्याओं के बारे में बातचीत कर सकें तो आपको अपने साथी को विश्वास में लेना होगा। यदि आपका अपने साथी पर भरोसा है तो आप बेझिझक अपने साथी को अपनी समस्या से रूबरू करवा सकते हैं।
अपने साथी को समझे- यदि आपका साथी आपसे कुछ बात करने का इच्छुक है लेकिन कह नहीं पा रहा तो आपको चाहिए कि आप अपने साथी को दिलासा दिलाएं कि आप हरदम उसके साथ है इसीलिए कोई भी परेशानी है तो वह आपसे आराम से शेयर कर सकता है।

संवाद है जरूरी- किसी भी बात को अपने साथी को बताने के लिए जरूरी है कि आप अपने साथी से लगातार संवाद करते रहें। यदि आप दोनों के बीच अच्छी तरह से बातचीत होगी तो आप सहज रूप से अपनी बात कह सकेंगे।

प्यार जताएं- यदि आप अपने साथी को अपनी कोई सेक्स समस्या से रूबरू करवाने जा रहे हैं तो आप उसे सीधे-सपाट शब्दों  में ना कहें बल्कि उसके लिए थोड़ा समय लें और अपने साथी को बातचीत और प्यार से सहज करें। इसके बात सामान्य बातचीत के बाद ही अपनी समस्या बताएं।

इशारों को समझे- 
आपको अपने साथी को इस तरह तैयार करना होगा कि वह आपकी बात बिना कहे भी समझ जाएं। यदि आप कोई बात शेयर करना चाहते हैं या फिर आप परेशानी में है तो आपके बिना बताएं आपका साथी आपको समझ जाए और आपसे खुद आपकी परेशानी को जानना चाहें।

पति-पत्नी के बीच प्यार तभी बरकरार रह सकता है जब आपसी सामंजस्य हो और दोनों के बीच खुलापन हो। ताकि दोनों में से कोई भी अपनी बात बताते समय मन में कोई डर या शंका ना रखें।

खुश रहने वाले लोगों की 7 आदतें


The 7 Habits of Happy People

Friends, खुश  रहना  मनुष्य  का जन्मजात  स्वाभाव  होता  है . आखिर  एक  छोटा  बच्चा  अक्सर  खुश  क्यों  रहता  है ? क्यों  हम  कहते  हैं  कि  childhood days life के  best days होते  हैं ? क्योंकि  हम  पैदाईशी  HAPPY होते  हैं ;  पर  जैसे -जैसे  हम  बड़े  होते  हैं  हमारा  environment, हमरा समाज  हमारे  अन्दर  impurity घोलना  शुरू  कर  देता  है ….और  धीरे -धीरे  impurity का  level इतना  बढ़  जाता  है  कि  happiness का  natural state sadness के  natural state में  बदलने  लगता  है .
पर  ऐसा  सबके  साथ  नहीं  होता  है  दुनिया  में  ऐसे बहुत से  लोग  हैं  जो  अपनी  Happy रहने  की  natural state को  बचाए  रख  पाते  हैं  और  Life-time खुशहाल  रहते  हैं .
 तो  क्या  ऐसे  व्यक्ति  हमेशा  खुश  रहते  हैं ?  नहीं , औरों  की  तरह  उनके  जीवन  में  भी  दुःख-सुख  का  आना  जाना  लगा  रहता  है ,  पर  आम तौर  पर  ऐसे  व्यक्ति  व्यर्थ की   चिंता  में  नहीं  पड़ते और  अक्सर  हँसते -मुस्कुराते  और  खुश  रहते  हैं .
तो  सवाल  ये  उठता  है  कि  जब  ये  लोग  खुश  रह  सकते  हैं  तो बाकी  सब  क्यों  नहीं ?आखिर उनकी ऐसी कौन सी आदतें हैं जो  उन्हें दुनिया भर की टेंशन के बीच भी खुशहाल बनाये रखती हैं ? आज  इस  लेख  के  जरिये  मैं  आपके  साथ  खुशहाल लोगों की 7 आदतें share करने जा रहा हूँ  जो  शायद  आपको  भी  खुश  रहने  में  मदद  करें .तो  आइये  जानते  हैं उन सात आदतों को : 
Habit 1: खुश  रहने  वाले  अच्छाई  खोजते  हैं  बुराई  नहीं :
Human beings की  natural tendency होती  है  कि  वो  negativity को  जल्दी  catch करते  हैं . Psychologists इस  tendency को  “Negativity bias” कहते  हैं .  अधिकतर  लोग  दूसरों  में  जो कमी  होती  है  उसे  जल्दी देख  लेते  हैं  और  अच्छाई  की  तरफ  उतना  ध्यान  नहीं  देते  पर  खुश  रहने  वाले  तो  हर एक चीज  में , हर एक  situation में  अच्छाई  खोजते  हैं , वो  ये  मानते  हैं  कि  जो  होता  है  अच्छा  होता  है .  किसी  भी  व्यक्ति  में  अच्छाई  देखना  बहुत  आसान  है ,बस  आपको  खुद  से  एक  प्रश्न  करना  है , कि , “ आखिर  क्यों  यह  व्यक्ति  अच्छा  है ?” , और  यकीन  जानिये  आपका  मस्तिष्क  आपको  ऐसी  कई  अनुभव और  बातें  गिना  देगा  की  आप  उस  व्यक्ति  में  अच्छाई  दिखने  लगेगी .
एक  बात  और , आपको  अच्छाई  सिर्फ  लोगों  में  ही  नहीं  खोजनी  है , बल्कि  हर एक  situation में  आपको  positive रहना  है  और  उसमे  क्या  अच्छा  है  ये  देखना  है . For example , अगर  आप  किसी  job interview में  select नहीं  हुए  तो  आपको  ये  सोचना  चाहिए  कि  शायद  भागवान  ने  आपके  लिए  उससे  भी  अच्छी  job रखी  है जो आपको देर-सबेर  मिलेगी, और आप किसी अनुभवी व्यक्ति से पूछ भी सकते हैं, वो भी आपको यही बताएगा .
Habit 2: खुश  रहने  वाले  माफ़  करना  जानते  हैं  और  माफ़ी  माँगना  भी :
हर  किसी  का  अपना -अपना  ego होता  है , जो  जाने -अनजाने  औरों  द्वारा  hurt हो  सकता  है . पर  खुश  रहने  वाले  छोटी -मोती  बातों को  दिल  से  नहीं  लगाते  वो   माफ़  करना  जानते  हैं , सिर्फ  दूसरों  को  नहीं  बल्कि  खुद  को  भी .
और  इसके  उलट  यदि  ऐसे  लोगों  से  कोई  गलती  हो  जाती  है , तो  वो  माफ़ी  मांगने  से  भी  नहीं  कतराते . वो  जानते  हैं  कि  व्यर्थ  का  ego उनकी  life को  complex बनाएगा  इसलिए  वो  “Sorry” बोलने  में  कभी  कंजूसी  नहीं  करते . मुझसे  भी जब गलती होती है तो मैं  कभी  उसे  सही  ठहराने  की  कोशिश  नहीं करता  और  उसे  स्वीकार  कर  के  क्षमा  मांग  लेता  हूँ .
माफ़  करना  और  माफ़ी  माँगना  आपके  दिमाग  को  हल्का  करता  है , आपको  बेकार   की  उलझन  और  परेशान  करने  वाली  thoughts से  बचाता  है , और  as a result आप  खुश  रहते  हैं . शिखा  जी  द्वारा  लिखा  गया  एक  बेहेतरीन  लेख “क्षमा  करना  क्यों  है  ज़रूरी ?” मैं  आपके साथ  पहले  ही  share कर  चुका  हूँ . यह  लेख   forgiveness के  बारे  में  आपकी   समझ  को  बेहतर  बना  सकता  है , इसे ज़रूर  पढ़ें .
Habit 3: खुश  रहने  वाले  लोग  अपने  चारो  तरफ  एक  strong support system develop करते  हैं :
ये   support system दो  pillars पे  टिका  होता  है  Family and Friends( F&F). ज़िन्दगी  में  खुश  रहने  के  लिए   F&F का  बहुत  बड़ा  योगदान  होता  है . भले  आपके  पास  दुनिया  भर  की  दौलत  हो  , शोहरत  हो  लेकिन  अगर  F&F नहीं  है  तो  आप  ज्यादा  समय  तक  खुश  नहीं  रह  पायेंगे .
हो  सकता  है  ये  आपको  बड़ी  obvious सी  बात  लगे , ये  लगे  की  आपके  पास  भी  बड़े  अच्छे  दोस्त   हैं  और  बहुत  प्यार  करने  वाला  परिवार  है , लेकिन  इस  पर  थोडा  गंभीरता  से  सोचिये . आपके  पास  ऐसे  कितने   friends हैं , जिन्हें  आप  बिना  किसी  झिझक  के  रात  के  3 बजे  भी  phone कर  के  उठा सकें  या कभी भी financial help ले सकें?
Family and friends को  कभी  भी for granted नहीं  लेना  चाहिए , एक  strong relationship बनाने  के  लिए  आपको  अपने  हितों  से  ऊपर  उठ  कर  देखना  होता  है . , दूसरे  की  care करनी  होती  है , और  उन्हें   genuinely like करना  होता  है . जितना  हो  सके  अपने  रिश्तों  को  बेहतर  बनाएं  , छोटी -छोटी  चीजें  जैसे  कि  Birthday wish करना, बधाई  देना , सच्ची  प्रशंशा  करना , मुस्कुराते  हुए  मिलना , गर्मजोशी  से  हाथ  मिलाना , गले  लगना  आपके  संबंधों  को  प्रगाढ़  बनता  है . और  जब  आप  ऐसा  करते  हैं  तो  बदले  में  आपको  भी  वही  मिलता  है और  आपकी  ज़िन्दगी  को  खुशहाल  बनाता  है .
Habit 4: खुश  रहने  वाले  अपने  मन  का  काम  करते  हैं  या  जो  काम  करते  हैं  उसमे  मन  लगाते हैं :
यदि  आप  अपने  interest का,  अपने  मन  का  काम  करते  हैं  तो  definitely वो  आपके  Happiness Quotient को  बढ़ाएगा ,  लेकिन  ज्यादातर  लोग  इतने  lucky नहीं  होते , उन्हें  ऐसी  job या  business में  लगना   पड़ता  है  जो  उनके  interest के  हिसाब  से  नहीं  होतीं . पर  खुश  रहने  वाले  लोग  जो  काम  करते  हैं  उसी  में  अपना  मन  लगा  लेते  हैं , भले  ही  parallely वो  अपना  पसंदीदा  काम   पाने  का  प्रयास  करते  रहे .
मैंने  कई  बार  लोगों  को जहाँ job करते हैं उस  company की  बुराई  करते  सुना  है , अपने  काम  को  दुनिया  का  सबसे  बेकार  काम  कहते  सुना  है , ऐसा  करना  आपकी  life को  और  भी  difficult बनता  है . खुश  रहने  वाले  अपने  काम  की  बुराई  नहीं  करते  , वो  उसके   सकारात्मक  पहलुओं  पर  focus करते  हैं  और  उसे  enjoy करते  हैं .
मगर  , यहाँ  मैं  यह  ज़रूर  कहना  चाहूँगा  कि   यदि  हम  दुनिया  के  सबसे  खुशहाल  लोगों को देखें  तो  वो  वही लोग  होंगे  जो  अपने  मन  का  काम  करते  हैं , इसलिए  यदि  आप  जो  कर  रहे  हैं  उसे   enjoy करना  , उससे   सीखना  अच्छी  बात  है   पर  Steve Jobs  की कही बात भी याद रखिये: ”आपका काम आपकी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा होगा, और truly-satisfied होने का एक ही तरीका है की आप वो करें जिसे आप सच-मुच एक बड़ा काम  समझते हों…और बड़ा काम करने का एक ही तरीका है की आप वो करें जो करना आप enjoy करते हों.”
Habit 5: खुश  रहने  वाले  हर  उस  बात  पर  यकीन  नहीं  करते  जो  उनके  दिमाग  में  आती  हैं :
Scientists के अनुसार  हमारा  brain हर  रोज़  60,000 thoughts produce करता  है  , और  एक  आम  आदमी  के  case में  इनमे  से  अधिकतर  thoughts negative होती  हैं . अगर  आप  daily अपने  brain को  हज़ारों  negative thoughts से  feed करेंगे  तो  खुश  रहना  तो  मुश्किल  होगा  ही . इसलिए  खुश  रहने  वाले  व्यक्ति   दिमाग  में  आ  रहे     बुरे  विचारों  को  अधिक  देर  तक  पनपने  नहीं  देते . वो  benefit of doubt देना   जानते  हैं , वो  जानते  हैं  कि  हो  सकता  है  जो  वो  सोच  रहे  हैं  वो  गलत  हो  , जिसे  वो  बुरा  समझ  रहे  हैं  वो  अच्छा  हो . ऐसा  कर  के  इंसान  relax हो  जाता  है , दरअसल  हमारी  सोच  के  हिसाब  से  brain में  ऐसे  chemical release होते  हैं  जो  हमारे  मूड  को  खुश  या  दुखी  करते  हैं .
जब  आप  नकारात्मक  विचारों  को  सच  मान  लेते  हैं  तो  आप  का  blood pressure बढ़ने  लगता  है  और  आप  tensionize हो  जाते  हैं , वहीँ  दूसरी  तरफ  जब  आप  उस  पर  doubt कर  देते  हैं  तो  आप  अनजाने  में  ही  brain को  relaxed रहने  का  signal दे  देते  हैं .
Habit 6: खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  अपने  जीवन  या  काम  को  किसी  बड़े  उद्देश्य  से जोड़ कर देखते हैं :
एक  बार  एक  बूढी  औरत  कहीं  से आ  रही  थी  कि  तभी  उसने  तीन  मजदूरों  को  कोई  ईमारत बनाते  देखा  . उसने  पहले  मजदूर  से  पूछा  ,” तुम  क्या  कर  रहे  हो  ?”, “ देखती  नहीं  मैं  ईंटे  ढो   रहा  हूँ .” उसने  जवाब  दिया .
फिर  वो  दुसरे  मजदूर  के  पास  गयी  और उससे  भी  वही  प्रश्न किया ,” तुम  क्या  कर  रहे  हो ?” ,” मैं  अपने  परिवार  का  पेट  पालने  के  लिए  मेहनत – मजदूरी  कर  रहा  हूँ ?’ उत्तर  आया  .
फिर वह  तीसरे  मजदूर  के  पास  गयी  और  पुनः  वही  प्रश्न   किया ,” तुम  क्या  कर  रहे  हो ?,
उस  व्यक्ति  ने  उत्साह  के  साथ  उत्तर  दिया , “ मैं  इस  शहर  का  सबसे  भव्य   मंदिर  बना  रहा  हूँ ”
आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इन तीनों में से कौन  सबसे अधिक खुश होगा!
दोस्तों, इस  मजदूर  की  तरह  ही  खुश  रहने  वाले  व्यक्ति  अपने  काम   को  किसी  बड़े  उद्देश्य   से  जोड़   कर  देखते  हैं , और   ऐसा  करना  वाकई  उन्हें  आपार  ख़ुशी  देता  है . ऐसा  मैं  इसलिए  भी  कह  पा  रहा  हूँ  क्योंकि  मैं  AchhiKhabar.Com को  भी  कुछ  इसी  तरह  देखता  हूँ .  मैं  ये  सोचता  हूँ  कि  इस  site के  जरिये  मैं  लाखों -करोड़ों  लोगों  की  ज़िन्दगी  को  बेहतर  बना  सकता  हूँ . मैं  हमेशा  यही  प्रयास  करता  हूँ  कि  कैसे  अच्छी  से  अच्छी  बातें  share करूँ  कि  पढने  वालों  की  life में  positive changes आएं , और  शायद  यही  वज़ह  है  कि  मैं  इस  काम   से  कभी  थकता  नहीं  हूँ  और  इसे  कर  के  सचमुच  बहुत  खुश  और  संतुष्ट  होता  हूँ .
Habit 7: खुश  रहने  वाले व्यक्ति अपनी  life में  होने  वाली  चीजों  के लिए खुद को जिम्मेदार मानते हैं :
खुश  रहने वाले व्यक्ति  responsibility लेना  जानते  हैं . अगर  उनके  साथ  कुछ  बुरा  होता  है  तो  वो  इसका  blame दूसरों  पर  नहीं  लगाते , बल्कि  खुद  को  इसके  लिए  जिम्मेदार  मानते  हैं .For example: अगर  वो  office के  लिए  late होते  हैं  तो  traffic jam को  नहीं  कोसते  बल्कि  ये  सोचते  हैं  कि  थोडा  पहले  निकलना  चाहिए  था .
अपनी  success का  credit दूसरों  को  भले  दे  दें  लेकिन  अपनी  failure के लिए खुद को ही जिम्मेदार मानें  . जब  आप  अपने  साथ  होने  वाली  बुरी  चीजों  के  लिए  दूसरों  को  दोष  देते  हैं  तो  आपके  अन्दर  क्रोध  आता  है , पर  जब  आप  खुद  को  जिम्मेदार  मान  लेते  हैं  तो  आप  थोडा  disappoint होते  हैं  और  फिर चीजों  को  सही करने के प्रयास में जुट जाते हैं . मैं  खुद   भी  अपनी  life में  होने  वाली  हर  एक  अच्छी  – बुरी  चीज  के  लिए  खुद  को  जिम्मेदार  मानता  हूँ . ऐसा  करने  से  मेरी  energy दूसरों  में  fault खोजने  की  जगह  खुद  को  improve करने  में  लगती  है , और  ultimately मेरी  happiness को  बढाती  है .
Friends, हो  सकता  है  आप  इनमे  से  कुछ बातों  को  already follow करते  हों  partially या  शायद  पूरी  तरह  से . पर  यदि  किसी  भी  Habit में  खुद  को  थोडा  सा   भी  improve करेंगे  तो  वो  definitely आपकी  happiness को  बढ़ाएगा . Personally मुझे  Habit 2 में  माफ़  करने  वाले  part को  improve करना  है .  तो  चलिए  हम  सब  साथ -साथ  अपने  Happiness Quotient को  बढ़ाते  हैं  और  एक  खुशहाल  जीवन  जीने  का  प्रयास  करते  हैं .
All the best! :)

कैसे रखता हूँ मैं खुद को Positive ?



दोस्तों आज मैं आपके साथ एक बड़ी ही interesting और important बात share कर रहा हूँ. एक ऐसी छोटी सी  बात जिसने मेरे thought process को improve करने और positive बनाने में बहुत मदद की है.
मुझे पूरी उम्मीद है कि ये आपके लिए भी उतना ही लाभदायक होगा.  ऐसा मैं इसलिए भी कह पा रहा हूँ कि क्योंकि इसे समझना  बहुत ही simple है. और इसे practically apply करना भी आसान है.
बात जनवरी 2010 की है मैं तब गोरखपुर में था. चूँकि मुझे नयी-नयी books पढने का शौक है , मैं एक दूकान में ऐसी ही कोई book खोज रहा था, तभी David J. Schwartz की लिखी हुई किताब ,” The Magic of Thinking Big”  मुझे नज़र आई.  दो -चार पन्ने पलटने के बाद मैं समझ गया कि इसमें दम है और मैंने वो book खरीद ली. वैसे तो इसमें मैंने कई लाभप्रद बातें पढ़ीं पर एक बात मेरे दिमाग में  घर कर गयी और आज मैं उसी के बारे में बता रहा हूँ.
हमारा दिमाग विचारों  का निर्माण  करने वाली  एक फैक्ट्री  है . इसमें हर  वक़्त  कोई ना  कोई thought  बनती  रहती  है. और इस  काम  को कराने  के लिए  हमारे  पास   दो  बड़े  ही आज्ञाकारी  सेवक  हैं और साथ ही ये अपने काम  में  माहिर  भी हैं . आप  कभी  भी इनकी  परीक्षा  ले  लीजिये  ये उसमे  सफल  ही होंगे . आइये  इनका  परिचय  कराता  हूँ-
पहले  सेवक  का  नाम  है-  Mr. Triumph  या  मिस्टर विजय
दुसरे  सेवक  का  नाम  है- Mr. Defeat या  मिस्टर  पराजय
Mr . विजय  का काम  है आपके आदेशानुसार  positive thoughts का निर्माण करना. और Mr. पराजय  का काम  है आपके आदेशानुसार  negative thoughts का निर्माण करना. और ये सेवक इतने निपुण हैं कि ये आपके इशारे के तुरंत समझ जाते हैं और बिना वक़्त गवाएं अपना काम शुरू कर देते हैं.
Mr. विजय इस बात को बताने में  में specialize करते हैं कि आप चीजों को क्यों कर सकते हैं?, आप क्यों सफल हो सकते हैं?
Mr. पराजय इस बात को बताने में specialize करते हैं कि आप चीजों  को क्यों नहीं कर सकते हैं?,आप  क्यों असफल हो सकते हैं?
जब  आप   सोचते  हैं  कि मेरी life क्यों अच्छी है तो तुरंत  Mr. विजय  इस  बात को सही  साबित  करने के लिए आपके दिमाग   में  positive thouhts produce करने लगते  है, जो आपके अब तक के जीवन के अनुभवों से निकल कर आती है . जैसे  कि-
  • मेरे पास  इतना  अच्छा  परिवार  है.
  • मुझे चाहने  वाले  कितने  सारे  अच्छे  लोग  हैं .
  • मैं well settled हूँ, financially इतना  सक्षम  हूँ कि खुश  रह  सकूँ .
  • मैं जो करना चाहता  हूँ वो कर पा रहा हूँ.
  •  etc.
इसके  विपरीत  जब  आप सोचते  हैं  कि मेरी life क्यों अच्छी नहीं  है  ,तो तुरंत  Mr. पराजय   इस  बात को सही  साबित   करने के लिए आपके दिमाग में  negative thoughts produce करने लगते  है. जैसे  कि-
  •  मैं अपनी  life में अभी  तक  कुछ  खास  नहीं  achieve कर पाया
  • मेरी नौकरी  मेरी काबलियत  के मुताबिक़  नहीं  है
  • मेरे साथ हमेशा  बुरा  ही होता  है.
  • etc.
ये दोनों  सेवक  जी जान   से  आपकी  बात का समर्थन  करते  हैं . अब  ये आपके ऊपर  depend करता  है कि आप  इसमें से  किसकी services  लेना  चाहते  हैं . इतना याद रखिये कि इनमे से आप जिसको ज्यादा काम देंगे वो उतना ही मजबूत होता जायेगा और एक दिन वो इस फैक्ट्री पर अपना कब्ज़ा कर लेगा, और धीरे-धीरे दुसरे सेवक को बिलकुल निकम्मा कर देगा.अब आप को decide करना है कि आप किसका कब्ज़ा चाहते हैं- मिस्टर विजय का या मिस्टर पराजय का?
यदि  life को improve करना है तो जितना  अधिक  हो  सके  thoughts produce करने का काम  Mr. विजय  को ही दीजिये . यानि  positive self talk कीजिये . नहीं तो अपने आप ही Mr. पराजय अपना अधिकार जमा लेंगे.
मैंने कई बार is simple but effective technique का use किया  है. मैं अपने thoughts पर हमेशा  नज़र रखता  हूँ और जैसे  ही negative thoughts का production बढ़ने  लगता  है मैं तुरंत  Mr. विजय  को काम  पर लगा  देता  हूँ, यानि  मैं  कुछ  ऐसे  statements खुद  से  बोलता  हूँ जो  positive thoughts की chain बना  देते  हैं  और मैं वापस  track पर आ जाता  हूँ.
For example: जब  मुझे लगता है कि मेरी personal relationships में तनाव आ रहा है तो मैं खुद से कहता हूँ कि भगवान ने  मुझे कितना प्यार करने वाले लोग दिए हैं. और बस आगे का काम मिस्टर विजय कर देते हैं. वो personal relationships से related मेरे सुखद अनुभव को मेरे सामने गिनाने लगते हैं और कुछ ही देर में मेरा mood बिलकुल सही हो जाता है. और जब mood सही हो जाता है तो वो मेरे actions में भी reflect करने लगता है.फिर तो सामने वाला भी ज्यादा देर तक नाराज़ नहीं रह पाता और जल्द ही सारी खटास निकल जाती है और फिर सब अच्छा लगने लगता है.
Thoughts को positive रखने का ये एक बहुत ही practical तरीका है. बस आपको जब भी लगे कि आपके ऊपर negativity हावी हो रही है तो तुरंत उस विचार के विपरीत विचार मन में लाइए. जैसे कि यदि आपके मन में विचार आता है कि आप काबिल नहीं हैं तो तुरन्त इसका उल्टा प्रश्न Mr. विजय से कीजिये कि ,” Mr. Vijay बताइए मैं काबिल क्यों हूँ?” और आप पायेंगे कि आपका ये सेवक आपके सामने उन अनुभवों को रखेगा जिसमे आपने कुछ अच्छा किया हो, for example, आपने कभी कोई prize जीता हो, किसी की मदद की हो, कोई ऐसी कला जिसमे आप औरों से बेहतर हों,etc.
बस इस बात का ध्यान रखियेगा कि आप स्वयं से जो प्रश्न कर रहे हैं वो सकारात्मक हो नकारात्मक नहीं.
आप भी इसे try कर  के देखिये. अपने thoughts पर नज़र रखिये , और जब आपको लगे कि मिस्टर पराजय कुछ ज्यादा ही सक्रीय हो रहे हैं तो जल्दी से कुछ positive self talk कीजिये और मिस्टर विजय को काम पर लगा दीजिये.
Thanks . I hope it works for you. :)

7 Habits जो बना सकतीं हैं आपको Super Successful



आपकी ज़िन्दगी बस यूँ ही नहीं घट जाती. चाहे आप जानते हों या नहीं ये आपही के द्वारा डिजाईन की जाती है. आखिरकार आप ही अपने विकल्प चुनते हैं. आप खुशियाँ चुनते हैं . आप दुःख चुनते हैं.आप निश्चितता चुनते हैं. आप अपनी अनिश्चितता चुनते हैं.आप अपनी सफलता चुनते हैं. आप अपनी असफलता चुनते हैं.आप साहस चुनते हैं.आप डर चुनते हैं.इतना याद रखिये कि हर एक क्षणहर एक परिस्थिति आपको एक नया विकल्प देती है.और ऐसे में आपके पास हमेशा ये opportunity होती है कि आप चीजों को अलग तेरीके से करें और अपने लिए औरpositive result produce  करें.
Habit 1 : Be Proactive / प्रोएक्टिव बनिए
Proactive  होने का मतलब है कि अपनी life के लिए खुद ज़िम्मेदार बनना. आप हर चीज केलिए अपने parents  या  grandparents  को नही blame कर सकते . Proactive  लोग इस बात को समझते हैं कि वो “response-able” हैं . वो अपने आचरण के लिए जेनेटिक्स परिस्थितियोंया परिवेष को दोष नहीं देते हैं.उन्हें पता होताहै कि वो अपना व्यवहार खुद चुनते हैं. वहीँ दूसरी तरफ जो लोगreactive  होते हैं वो ज्यादातर अपने भौतिक वातावरण से प्रभावितहोते हैं. वो अपने behaviour  के लिए बाहरी चीजों को दोष देते हैं. अगर मौसम अच्छा हैतोउन्हें अच्छा लगता है.और अगर नहीं है तो यह उनके attitude और  performance  को प्रभावित करता हैऔर वो मौसम को दोष देते हैं. सभी बाहरी ताकतें एक उत्तेजना  की तरह काम करती हैं जिन पर हम react करते हैं. इसी उत्तेजना और आप उसपर जो प्रतिक्रिया करते हैं के बीच में आपकी सबसे बड़ी ताकत छिपी होती है- और वो होती है इस बात कि स्वतंत्रता कि आप  अपनी प्रतिक्रिया का चयन स्वयम कर सकते हैं. एक बेहद महत्त्वपूर्ण चीज होती है कि आप इस बात का चुनाव कर सकते हैं कि आप क्या बोलते हैं.आप जो भाषा प्रयोग करते हैं वो इस बात को indicate  करती है कि आप खुद को कैसे देखते हैं.एक proactive व्यक्ति proactive भाषा का प्रयोग करता है.–मैं कर सकता हूँमैं करूँगा, etc. एक reactive  व्यक्ति reactive  भाषा का प्रयोग करता है- मैं नहीं कर सकताकाश अगर ऐसा होता , etc. Reactive  लोग  सोचते हैं कि वो जो कहते और करते हैं उसके लिए वो खुद जिम्मेदार नहीं हैं-उनके पास कोई विकल्प नहीं है.
ऐसी परिस्थितियां जिन पर बिलकुल भी नहीं या थोड़ा-बहुत control किया जा सकता है उसपरreact या चिंता करने के बजाये proactive  लोग अपना time  और  energy  ऐसी चीजों में लगाते हैं जिनको वो  control  कर सकें. हमारे सामने जो भी समस्याएं ,चुनतिया या अवसर होते हैं उन्हें हम दो क्षेत्रों में बाँट सकते हैं:
 
1)Circle of Concern ( चिंता का क्षेत्र )

2)Circle of Influence. (प्रभाव का क्षेत्र )
Proactive  लोग अपना प्रयत्न Circle of Influence पर केन्द्रित करते हैं.वो ऐसी चीजों पर काम करते हैं जिनके बारे में वो कुछ कर सकते हैं: स्वास्थ्य बच्चे कार्य क्षेत्र कि समस्याएं. Reactive  लोग अपना प्रयत्न Circle of Concern पर केन्द्रित करते हैं: देश पर ऋण आतंकवादमौसम. इसबात कि जानकारी होना कि हम अपनी energy किन चीजों में खर्च करते हैं, Proactive  बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है
Habit 2: Begin with the End in Mind  अंत को ध्यान में रख कर शुरुआत करें. 
तो , आप बड़े होकर क्या बनना चाहते हैंशायद यह सवाल थोड़ा अटपटा लगे,लेकिन आप इसके बारे में एक क्षण के लिए सोचिये. क्या आप अभी वो हैं जो आप बनना चाहते थेजिसका सपना आपने देखा थाक्या आप वो कर रहे हैं जो आप हमेशा से करना चाहते थे. इमानदारी से सोचिये. कई बार ऐसा होता है कि लोग खुद को ऐसी जीत हांसिल करते हुए देखते हैं जो दरअसल खोखली होती हैं–ऐसी सफलताजिसके बदले में उससे कहीं बड़ी चीजों को  गवाना पड़ा. यदि आपकी सीढ़ी सही दीवा पर नहीं लगी है तो आप जो भी कदम उठाते हैं वो आपको गलत जगह पर लेकर जाता है.

Habit 2  
आपके imagination या  कल्पना  पर आधारित है– imagination , यानि आपकी वो क्षमता जो आपको अपने दिमाग में उन चीजों को दिखा सके जो आप अभी अपनी आँखों से नहीं देख सकते. यह इस सिधांत पर आधारित है कि हर एक चीज का निर्माण दो बार होता है. पहला mental creation, और दूसरा physical creation. जिस  तरह blue-print तैयार होने केबाद मकान बनता है उसी प्रकार mental  creation  होने के बाद ही physical creation होती है.अगर आप खुद  visualize  नहीं करते हैं कि आप क्या हैं और क्या बनना चाहते हैं तो आपआपकी life कैसी होगी इस बात का फैसला औरों पर और परिस्थितियों पर छोड़ देते हैं. Habit 2  इस बारे में है कि आप किस तरह से अपनी विशेषता को पहचानते हैं,और फिर अपनी personal, moral और  ethical  guidelines के अन्दर खुद को खुश रख सकते और पूर्ण कर सकते हैं.अंत को ध्यान में रख कर आरम्भ करने का अर्थ हैहर दिन ,काम या project  की शुरआत एक clear vision  के साथ करना कि हमारी क्या दिशा और क्या मंजिल होनी चाहिएऔर फिर proactively  उस काम को पूर्ण करने में लग जाना.
Habit 2  को practice मेंलाने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपना खुद का एक Personal Mission Statement बनाना. इसका फोकस इस बात पर होगा कि आप क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं.ये success के लिए की गयी आपकी planning है.ये इस बात की पुष्टिकरता है कि आप कौन हैं,आपके goals को focus  में रखता हैऔर आपके ideas  को इस दुनिया में लाता है. आपकाMission Statement आपको अपनी ज़िन्दगी का leader बनाता है. आप अपना भाग्य खुद बनाते हैं,और जो सपने आपने देखे हैं उन्हें साकार करते हैं.
Habit 3 : Put First Things First प्राथमिक चीजों को वरीयता दें
एक balanced life  जीने के लिएआपको इस बात को समझना होगा कि आप इस ज़िन्दगीमें हर एक चीज नहीं कर सकते. खुद को अपनी क्षमता से अधिक कामो में व्यस्त करने की ज़रुरत नहीं है. जब ज़रूरी हो तो “ना” कहने में मत हिचकियेऔर फिर अपनी important priorities परfocus  कीजिये.
Habit 1  
कहतीहै कि , ” आप in charge हैं .आप creator हैं”. Proactive होना आपकी अपनी choice है.Habit 2 पहले दिमाग में चीजों को visualize  करने के बारे में है. अंत को ध्यान में रख कर शुरआत करना vision से सम्बंधित है. Habit 3  दूसरी creation , यानि  physical creation  के बारे में है. इसhabit में Habit 1 और Habit 2  का समागम होता है. और यह हर समय हर क्षण होता है. यह Time Management  से related कई प्रश्नों को  deal  करता है.
लेकिन यह सिर्फ इतना ही नहीं है. Habit 3  life management  के बारे में भी है—आपका purpose, values, roles ,और priorities. “प्राथमिक चीजें” क्या हैं?  प्राथमिक चीजें वह हैं जिसको आप व्यक्तिगत रूप से सबसे मूल्यवान मानते हों. यदि आप प्राथमिक कार्यों को तरजीह देने का मतलब है कि आप अपना समय अपनी उर्जा Habit 2  में अपने द्वारा set की गयीं priorities पर लगा रहे हैं.
Habit 4: Think Win-Win  हमेशा जीत के बारे में सोचें
Think Win-Win अच्छा होने के बारे में नहीं हैना ही यह कोईshort-cut है. यहcharacter पर आधारित एक कोड है जो आपको बाकी लोगों सेinteract और सहयोग करने के लिए है.
हममे से ज्यादातर लोग अपना मुल्यांकन दूसरों सेcomparison और  competition  के आधार पर करते हैं. हम अपनी सफलता दूसरों की असफलता में देखते हैं—यानि अगर मैं जीतातो तुम हारेतुम जीते तो मैं हारा. इस तरह life एकzero-sum game बन जाती है. मानो एक ही रोटी होऔर अगर दूसरा बड़ा हिस्सा ले लेता है तो मुझे कम मिलेगाऔर मेरी कोशिश होगी कि दूसरा अधिक ना पाए. हम सभी येgame  खेलते हैंलेकिन आप ही सोचिये कि इसमें कितना मज़ा है?
Win -Win ज़िन्दगी कोco-operation की तरह देखती है, competition कीतरह नहीं.Win-Win दिल और दिमाग की ऐसी स्थिति है जो हमेंलगातार सभी काहित सोचने के लिए प्रेरित करती है.Win-Winका अर्थ है ऐसे समझौते और समाधान जो सभी के लिए लाभप्रद और संतोषजनक हैं. इसमें सभी   खाने को मिलती हैऔर वो काफी अच्छाtaste  करती है.
एक व्यक्ति या संगठन जोWin-Win attitude  के साथ समस्याओं को हल करने की कोशिश करता है उसके अन्दर तीन मुख्य बातें होती हैं:
  1.  Integrity / वफादारी :अपनेvalues, commitments औरfeelings के साथ समझौता ना करना.
  2. Maturity / परिपक्वता :  अपनेideas औरfeelings  को साहस के साथ दूसरों के सामने रखना और दूसरों के विचारों और भावनाओं की भी कद्र करना.
  3. Abundance Mentality / प्रचुरता की मानसिकता :इस बात में यकीन रखना की सभी के लिए बहुत कुछ है.
बहुत लोग either/or  केterms  में सोचते हैं: या तो आप अच्छे हैं या आप सख्त हैं. Win-Win में दोनों की आवश्यकता होती है. यह साहस और सूझबूझ के बीचbalance  करने जैसा है.Win-Win को अपनाने के लिए आपको सिर्फ सहानभूतिपूर्ण ही नहीं बल्कि आत्मविश्वाश से लबरेज़ भी होना होगा.आपको सिर्फ विचारशील और संवेदनशील ही नहीं बल्कि बहादुर भी होना होगा.ऐसा करनाकि -courage और  consideration मेंbalance  स्थापित होयहीreal maturity  हैऔर Win-Win  के लिए बेहद ज़रूरी है.
Habit 5: Seek First to Understand, Then to Be Understood / पहले दूसरों को समझो फिर अपनी बात समझाओ.
Communication  लाइफ की सबसे ज़रूरी skill  है. आप अपने कई साल पढना-लिखना और बोलना सीखने में लगा देते हैं. लेकिन सुनने का क्या हैआपको ऐसी कौनसी training  मिली हैजो आपको दूसरों को सुनना सीखाती है,ताकि आप सामने वाले को सच-मुच अच्छे से समझ सकेंशायद कोई नहींक्यों?
अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं तो शायद आप भी पहले खुद आपनी बात समझाना चाहते होंगे. और ऐसा करने में आप दुसरे व्यक्तिको पूरी तरह ignore कर देते होंगे ऐसा दिखाते होंगे कि आप सुन रहे हैं,पर दरअसल आप बस शब्दों को सुनते हैं परउनके असली मतलब को पूरी तरह से miss  कर जाते हैं.
 सोचिये ऐसा क्यों होता हैक्योंकि ज्यादातर लोग इस intention  के साथ सुनते हैं कि उन्हें reply करना हैसमझना नहीं है.आप अन्दर ही अन्दर खुद को सुनते हैं और तैयारी  करते हैं कि आपको आगे क्या कहना है,क्या सवाल पूछने हैं, etc. आप जो कुछ भी सुनते हैं वो आपके life-experiences से छनकर आप तक पहुचता है.
आप जो सुनते हैं उसे अपनी आत्मकथा से तुलना कर देखते हैं कि ये सही है या गलत. और इस वजह से आप दुसरे की बात ख़तम होने से पहले ही अपने मन में एक धारणा बना लेते हैं कि अगला क्या कहना चाहता है.  क्या ये वाक्य कुछ सुने-सुने से लगते है?
अरेमुझे पता है कि तुम कैसा feel  कर रहे हो.मुझे भी ऐसा ही लगा था.” “मेरे साथ भी भी ऐसा ही हुआ था.” ” मैं तुम्हे बताता हूँ कि ऐसे वक़्तमें मैंने क्या किया था.”
चूँकि आप अपने जीवन के अनुभवों के हिसाब से ही दूसरों को सुनते हैं. आप इन चारों में से किसी एक तरीके से ज़वाब देते हैं:
Evaluating/ मूल्यांकन:पहले आप judge करते हैं उसके बाद सहमत या असहमत होते हैं.
Probing / जाँच :आप अपने हिसाब से सवाल-जवाब करते हैं.
Advising/ सलाह :आप सलाह देते हैं और उपाय सुझाते हैं.
Interpreting/ व्याख्या :आप दूसरों के मकसद और व्यवहार को अपने experience के हिसाब से analyze करते हैं.
शायदआप सोच रहे हों कि, अपनेexperience के हिसाब से किसी सेrelate करने में बुराई क्याहै?कुछsituations में ऐसा करना उचित हो सकत है, जैसे कि जब कोई आपसे आपके अनुभवों के आधार पर कुछ बतानेके लिए कहे, जब आप दोनों के बीच एकtrust कीrelationship हो. पर हमेशा ऐसा करना उचित नहीं है.
Habit 6: Synergize / ताल-मेल बैठाना
सरल शब्दों में समझें तो , “दो दिमाग एक से बेहतर हैं ” Synergize करने का अर्थ है रचनात्मक सहयोग देना. यह team-work है. यह खुले दिमाग से पुरानी समस्याओं के नए निदान ढूँढना है.
पर ये युहीं बस अपने आप ही नहीं हो जाता. यह एक process है , और उसी process से, लोग अपनेexperience और expertise को उपयोग में ला पाते हैं .अकेले की अपेक्षा वो एक साथ कहीं अच्छाresult दे पाते हैं. Synergy से हम एक साथ ऐसा बहुत कुछ खोज पाते हैं जो हमारे अकेले खोजने पर शायद ही कभी मिलता. ये वो idea है जिसमे the whole is greater than the sum of the parts. One plus one equals three, or six, or sixty–या उससे भी ज्यादा.
जब लोग आपस में इमानदारी से interact करने लगते हैं, और एक दुसरे से प्रभावित होने के लिए खुले होते हैं , तब उन्हें नयी जानकारीयाँ मिलना प्रारम्भ हो जाता है. आपस में मतभेद नए तरीकों के आविष्कार की क्षमता कई गुना बढ़ा देते हैं.
मतभेदों को महत्त्व देना synergy का मूल है. क्या आप सच-मुच लोगों के बीच जो mental, emotional, और psychological differences होते हैं, उन्हें महत्त्व देते हैं? या फिर आप ये चाहते हैं कि सभी लोग आपकी बात मान जायें ताकि आप आसानी से आगे बढ़ सकें? कई लोग एकरूपता को एकता समझ लेते हैं. आपसी मतभेदों को weakness नहीं strength के रूप में देखना चाहिए. वो हमारे जीवन में उत्साह भरते हैं.
Habit 7: Sharpen the Saw कुल्हाड़ी को तेज करें
Sharpen the Saw का मतलब है अपने सबसे बड़ी सम्पत्ति यानि खुद को सुरक्षित रखना. इसका अर्थ है अपने लिए एक प्रोग्राम डिजाईन करना जो आपके जीवन के चार क्षेत्रों physical, social/emotional, mental, and spiritual में आपका नवीनीकरण करे. नीचे ऐसी कुछ activities केexample दिए गए हैं:
 Physical / शारीरिक :अच्छा खाना, व्यायाम करना, आराम करना
 Social/Emotional /:सामजिक/भावनात्मक :औरों के ससाथ सामाजिक और अर्थपूर्ण सम्बन्ध बनाना.
 Mental / मानसिक :पढना-लिखना, सीखना , सीखना.
 Spiritual / आध्यात्मिक :प्रकृति के साथ समय बीताना , ध्यान करना, सेवा करना.
आप जैसे -जैसे हर एक क्षेत्र में खुद को सुधारेंगे, आप अपने जीवन में प्रगति और बदलाव लायेंगे.Sharpen the Saw आपको fresh रखता है ताकि आप बाकी की six habits अच्छे से practice कर सकें. ऐसा करने से आप challenges face करने की अपनी क्षमता को बढ़ा लेते हैं. बिना ऐसा किये आपका शरीर कमजोर पड़ जाता है , मस्तिष्क बुद्धिरहित हो जाता है, भावनाए ठंडी पड़ जाती हैं,स्वाभाव असंवेदनशील हो जाता है,और इंसान स्वार्थी हो जाता है. और यह एक अच्छी तस्वीर नहीं है, क्यों?
आप अच्छा feel करें , ऐसा अपने आप नहीं होता. एक balanced life जीने काअर्थ है खुद कोrenew करने के लिए ज़रूरी वक़्त निकालना.ये सब आपके ऊपरहै .आप खुद को आराम करकेrenew कर सकते हैं. या हर काम अत्यधिक करके खुद को जला सकते हैं . आप खुद को mentallyऔर spiritually प्यार कर सकते हैं , या फिर अपने well-being से बेखबर यूँ ही अपनी ज़िन्दगी बिता सकते हैं.आप अपने अन्दर जीवंत उर्जा का अनुभव कर सकते हैं या फिर टाल-मटोल कर अच्छे स्वास्थ्य और व्यायाम के फायदों को खो सकते हैं.
आप खुद को पुनर्जीवित कर सकते हैं और एक नए दिन का स्वागत शांति और सद्भावके साथ कर सकते हैं.या फिर आप उदासी के साथ उठकर दिन को गुजरते देख सकतेहैं. बस इतना याद रखिये कि हर दिन आपको खुद को renew करने का एक नया अवसरदेता है, अवसर देता है खुद को recharge करने का. बस ज़रुरत है Desire (इच्छा),Knowledge( ज्ञान)और Skills(कौशल) की.