Sunday, 28 October 2012

5 चीजें जो आपको नहीं करनी चाहिए और क्यों ?


5 things you should stop doing.
दोस्तों  जाने  अनजाने  हम  ऐसी  कई  चीजें करते  हैं  जो  हमारे  personal development के  लिए  ठीक  नहीं  होतीं. वैसे  तो  इन  चीजों  की  list बहुत  लम्बी  हो  सकती  है  पर  मैं  आपके  साथ  सिर्फ  पांच  ऐसी  बातें  share कर  रहा  हूँ  जो  मैं  follow करता  हूँ .हो  सकता  है  कि  आप  already इनमे  से  कुछ  चीजें  practice करते  हों , पर  अगर  आप  यहाँ  से  कुछ  add-on कर  पाते  हैं  तो  definitely वो  आपके  life को  better बनाएगा . So , let’s see those 5 things:

5 चीजें  जो  आपको  नहीं  करनी  चाहिए  और  क्यों ?

 1) दूसरे  की  बुराई  को  enjoy करना 
ये  तो  हम  बचपन  से  सुनते  आ  रहे  हैं  की  दुसरे  के  सामने  तीसरे  की  बुराई  नहीं  करनी  चाहिए , पर  एक और  बात  जो  मुझे  ज़रूरी  लगती  है  वो  ये  कि  यदि  कोई  किसी  और  की  बुराई  कर  रहा  है  तो  हमें  उसमे  interest नहीं  लेना  चाहिए  और  उसे  enjoy नहीं  करना  चाहिए . अगर  आप  उसमे  interest दिखाते  हैं  तो  आप  भी  कहीं  ना  कहीं  negativity को  अपनी  ओर  attract करते  हैं . बेहतर  तो  यही  होगा  की  आप  ऐसे  लोगों  से  दूर  रहे  पर  यदि  साथ  रहना  मजबूरी  हो  तो  आप  ऐसे  topics पर  deaf and dumb हो  जाएं  , सामने  वाला  खुद  बखुद  शांत  हो  जायेगा . For example यदि  कोई  किसी  का  मज़ाक  उड़ा रहा  हो  और  आप  उस पे  हँसे  ही  नहीं  तो  शायद  वो  अगली  बार  आपके  सामने  ऐसा  ना  करे . इस  बात  को  भी  समझिये  की  generally जो  लोग  आपके  सामने  औरों  का  मज़ाक  उड़ाते  हैं  वो  औरों  के  सामने  आपका  भी  मज़ाक  उड़ाते  होंगे . इसलिए  ऐसे  लोगों  को  discourage करना  ही  ठीक  है .
2) अपने  अन्दर  को  दूसरे  के  बाहर  से  compare करना 
इसे  इंसानी  defect कह  लीजिये  या  कुछ  और  पर  सच  ये  है  की  बहुत  सारे  दुखों  का  कारण  हमारा  अपना  दुःख  ना  हो  के  दूसरे   की  ख़ुशी  होती  है . आप  इससे  ऊपर  उठने  की  कोशिश  करिए , इतना  याद  रखिये  की  किसी  व्यक्ति  की  असलियत  सिर्फ  उसे  ही  पता  होती  है , हम  लोगों  के  बाहरी यानि नकली रूप  को  देखते  हैं  और  उसे  अपने  अन्दर के यानि की असली  रूप  से  compare करते  हैं . इसलिए  हमें लगता  है  की  सामने  वाला  हमसे  ज्यादा  खुश  है , पर  हकीकत  ये  है  की  ऐसे  comparison का  कोई  मतलब  ही  नहीं  होता  है . आपको  सिर्फ  अपने  आप  को  improve करते  जाना  है और व्यर्थ की comparison नहीं करनी है.
3) किसी  काम  के  लिए  दूसरों  पर  depend करना 
मैंने  कई  बार  देखा  है  की  लोग  अपने  ज़रूरी काम  भी  बस  इसलिए  पूरा  नहीं  कर  पाते क्योंकि  वो  किसी  और  पे  depend करते  हैं . किसी  व्यक्ति  विशेष  पर  depend मत  रहिये . आपका  goal; समय  सीमा  के  अन्दर  task का  complete करना  होना चाहिए  , अब  अगर  आपका  best  friend तत्काल  आपकी  मदद  नहीं  कर  पा  रहा  है  तो  आप  किसी  और  की  मदद  ले  सकते  हैं , या  संभव  हो  तो  आप  अकेले  भी  वो  काम  कर  सकते  हैं .
ऐसा  करने  से  आपका  confidence बढेगा , ऐसे  लोग  जो  छोटे  छोटे  कामों  को  करने  में  आत्मनिर्भर  होते  हैं  वही  आगे  चल  कर  बड़े -बड़े  challenges भी  पार  कर  लेते  हैं , तो  इस  चीज  को  अपनी  habit में  लाइए  : ये  ज़रूरी  है की  काम  पूरा  हो  ये  नहीं  की  किसी  व्यक्ति  विशेष  की  मदद  से  ही  पूरा  हो .
4) जो बीत गया  उस  पर  बार  बार  अफ़सोस  करना
अगर  आपके  साथ  past में  कुछ  ऐसा  हुआ  है  जो  आपको  दुखी  करता  है  तो  उसके  बारे  में  एक  बार  अफ़सोस  करिए…दो  बार  करिए….पर  तीसरी  बार  मत  करिए . उस  incident से जो सीख  ले  सकते  हैं  वो  लीजिये  और  आगे  का  देखिये . जो  लोग  अपना  रोना  दूसरों  के  सामने  बार-बार  रोते  हैं  उसके  साथ  लोग  sympathy दिखाने  की  बजाये उससे कटने  लगते  हैं . हर  किसी  की  अपनी  समस्याएं  हैं  और  कोई  भी  ऐसे  लोगों  को  नहीं  पसंद  करता  जो  life को  happy बनाने  की  जगह  sad बनाए . और  अगर  आप  ऐसा  करते  हैं  तो  किसी  और  से  ज्यादा  आप ही  का  नुकसान  होता  है . आप  past में  ही  फंसे  रह  जाते  हैं , और  ना  इस  पल  को  जी  पाते  हैं  और  ना  future के  लिए  खुद  को prepare कर  पाते  हैं .
5) जो  नहीं  चाहते  हैं  उसपर  focus करना 
सम्पूर्ण ब्रह्मांड में हम जिस चीज पर ध्यान केंद्रित करते हैं उस चीज में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है.  इसलिए   आप  जो  होते  देखना  चाहते  हैं  उस  पर  focus करिए , उस  बारे  में  बात  करिए  ना  की  ऐसी  चीजें  जो  आप  नहीं  चाहते  हैं . For example: यदि  आप अपनी  income बढ़ाना  चाहते  हैं  तो  बढती  महंगाई  और  खर्चों  पर  हर  वक़्त  मत  बात  कीजिये  बल्कि  नयी  opportunities और  income generating ideas पर  बात  कीजिये .
इन  बातों पर  ध्यान  देने  से  आप  Self Improvement के  रास्ते  पर  और  भी  तेजी  से  बढ़ पायेंगे  और  अपनी  life को  खुशहाल  बना  पायेंगे . All the best. :)
—————————————————————-

जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है ?


जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है ?

Hi friends,
यदि  आपसे पूछा जाये कि क्या आपने अपने लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित कर रखे हैं तो आपके सिर्फ दो ही जवाब हो सकते हैं: हाँ या ना .
अगर जवाब हाँ है तो ये बहुत ही अच्छी बात है क्योंकि ज्यादातर लोग तो बिना किसी निश्चित लक्ष्य के ही ज़िन्दगी बिताये जा रहे हैं और आप उनसे कहीं बेहतर इस्थिति में हैं. पर यदि जवाब ना है तो ये थोड़ी चिंता का विषय है. थोड़ी इसलिए क्योंकि भले ही अभी आपका कोई लक्ष्य ना हो पर जल्द ही सोच-विचार कर के अपने लिए एक लक्ष्य निर्धारित कर सकते हैं.लक्ष्य या Goals  होते क्या हैं? लक्ष्य एक ऐसा कार्य है जिसे हम सिद्ध करने की मंशा रखते हैं.  Goal is a task which we intend to accomplish. कुछ examples लेते हैं: एक  student का लक्ष्य हो सकता है: ” Final Exams  में 80% से ज्यादा marks लाना.” एक employee लक्ष्य हो सकता है अपनी performance  के basis पे promotion पाने का. एक house-wife का लक्ष्य हो सकता है :” Home based business कि शुरुआत करना. एक blogger का लक्ष्य हो सकता है:” अपने ब्लॉग कि page rank शुन्य से तीन तक ले जाना” एक समाजसेवी का लक्ष्य हो सकता है:” किसी गाँव के सभी लोगों को साक्षर बनाना”
लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है:
१) सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए: जब आप सुबह घर से निकलते हैं तो आपको पता होता है कि आपको कहाँ जाना है और आप वहां पहुँचते हैं , सोचिये अगर आपको यह नहीं पता हो कि आप को कहाँ जाना है तो भला आप क्या करेंगे? इधर उधर भटकने में ही समय व्यर्थ हो जायेगा. इसी तरह इस जीवन में भी यदि आपने अपने लिए लक्ष्य नहीं बनाये हैं तो आपकी ज़िन्दगी तो चलती रहेगी पर जब आप बाद में पीछे मुड़ कर देखेंगे तो शायद आपको पछतावा हो कि आपने कुछ खास achieve  नहीं किया!! लक्ष्य व्यक्ति को एक सही दिशा देता है. उसे बताता है कि कौन सा काम उसके लिए जरूरी है और कौन सा नहीं.  यदि goals clear हों तो हम उसके मुताबिक अपने आप को तैयार करते हैं. हमारा subconscious mind हमें उसी के अनुसार act करने के लिए प्रेरित करता है. दिमाग में लक्ष्य साफ़ हो तो उसे पाने के रास्ते भी साफ़ नज़र आने लगते हैं और इंसान उसी दिशा में अपने कदम बढा देता है.
२) अपनी उर्जा का सही उपयोग करने के लिए: भागवान ने इन्सान को सीमित उर्जा और सिमित  समय दिया है. इसलिए ज़रूरी हो जाता है कि हम इसका उपयोग सही तरीके से करें. लक्ष्य हमें ठीक यही करने को प्रेरित करता है. अगर आप अपने end-goal को ध्यान में रख कर कोई काम करते हैं तो उसमे आपका concentration और energy का  level कहीं अच्छा होता है. For Example: जब आप किसी  library में बिना किसी खास किताब को पढने  के मकसद से जाते हैं तो आप यूँ ही  कुछ किताबों को उठाते हैं और उनके पन्ने पलटते हैं और कुछ एक पन्ने पढ़ डालते हैं, पर वहीँ अगर आप कसी Project Report को पूरा करने के मकसद से जाते हैं तो आप उसके मतलब कि ही किताबें चुनते हैं और अपना काम पूरा करते हैं. दोनों ही cases में आप समय उतना ही देते हैं पर आपकी  efficiency में जमीन-आसमान का फर्क होता है. इसी तरह life  में भी अगर हमारे सामने कोई निश्चित लक्ष्य नहीं है तो हम यूँ ही अपना  energy  waste करते रहेंगे और नतीजा कुछ खास नहीं निकलेगा. लेकिन इसके विपरीत जब हम लक्ष्य को ध्यान में रखेंगे तो हमारी energy सही जगह उपयोग होगी और हमें सही results देखने को मिलेंगे.
३) सफल होने के लिए: जिससे पूछिए वही कहता है कि मैं एक सफल व्यक्ति बनना चाहता.पर अगर ये पूछिए कि क्या हो जाने पर वह खुद को सफल व्यक्ति मानेगा तो इसका उत्तर कम ही लोग पूर विश्वास से दे पाएंगे. सबके लिए सफलता के मायने अलग-अलग होते हैं. और यह मायने लक्ष्य द्वारा ही निर्धारित होते हैं. तो यदि आपका कोई लक्ष्य नहीं है तो आप एक बार को औरों कि नज़र में सफल हो सकते हैं पर खुद कि नज़र में आप कैसे decide  करेंगे कि आप सफल हैं या नहीं?  इसके लिए आपको अपने द्वारा ही तय किये हुए लक्ष्य को देखना होगा.
४) अपने मन के विरोधाभाष को दूर करने के लिए:  हमारी life में कई opportunities  आती-जाति रहती हैं. कोई चाह कर भी सभी की सभी opportunities का फायदा नहीं उठा सकता. हमें अवसरों को कभी हाँ तो कभी ना करना होता है. ऐसे में ऐसी  परिस्थितियां आना स्वाभाविक है, जब हम decide  नहीं कर पाते कि हमें क्या  करना चाहिए. ऐसी situation  में आपका लक्ष्य आपको guide कर सकता है. जैसे मेरा और मेरी wife  का लक्ष्य एक  Beauty Parlour खोलने का है, ऐसे में अगर आज उसे एक ही साथ दो job-offers मिलें , जिसमें से एक किसी पार्लर से हो तो वह बिना किसी confusion के उसे ज्वाइन कर लेगी , भले ही वहां उसे दुसरे offer के comparison  में कम salary मिले. वहीँ अगर सामने कोई लक्ष्य ना हो तो हम तमाम factors को evaluate करते रह जायें और अंत में  शायद ज्यादा वेतन ही deciding factor  बन जाये.
दोस्तों  अर्नोल्ड एच ग्लासगो का कथन  ”फुटबाल कि तरह ज़िन्दगी में भी आप तब-तक आगे नहीं बढ़ सकते जब तक आपको अपने लक्ष्य का पता ना हो.”  मुझे बिलकुल उपयुक्त लगता है. तो यदि आपने अभी तक अपने लिए कोई लक्ष्य निर्धारित किया है तो इस दिशा में सोचना शुरू कीजिये.
Thanks :)

S.M.A.R.T होना चाहिए आपका लक्ष्य !


Goal Setting: S.M.A.R.T होना  चाहिए  आपका  लक्ष्य !

दोस्तों यहाँ  मैं  आपके  सामने  कुछ  मिलते  जुलते  goals लिख  रहा  हूँ :
  • मुझे  अच्छे number लाने  हैं .
  • मुझे  Maths में  अच्छे  number लाने  हैं .
  • मुझे  annual exam में  Maths में  अच्छे  number लाने  हैं. 
  • मुझे  annual exam में  Maths में  कम  से  कम  80 number लाने  हैं. 
  • मुझे  annual exam में  Maths में 100 number लाने  हैं. 
इन  goals में  से  एक  ही  ऐसा  है  जिसे  SMART कहा  जा  सकता  है . क्या  आप  बता  सकते  हैं  वो  कौन  सा  है ?
सही  उत्तर  जानने  से पहले  आइये  जानते  हैं  की  SMART goal का  मतलब  क्या  होता  है :
SMART  का  मतलब  है :
S –Specific (स्पष्ट)
M -Measurable (जिसे मापा जा सके)
A-Achievable (पूर्ण करने योग्य)
R- Realistic ( वास्तविक)
T- Time-bound ( समय में बंधा हुआ)
एक  SMART goal में  ऊपर  बतायी  गयी  सभी  qualities होनी  चाहियें .
1)      Specific : आपका  लक्ष्य  बिलकुल  clear होना  चाहिए . उसे  सुनने  या  पढने  के  बाद  उसे  लेकर  कोई  संशय  नहीं  होना  चाहिए . अगर  कोई  कहता  है  कि  उसे  “अच्छे  number लाने  हैं ” तो  ये  बात  clear नहीं  होती  कि  वो  किस  subject या  exam की  बात  कर  रहा है  जिसमे  उसे  अच्छे  number लाने  हैं . और  अच्छे  से  क्या  मतलब  है ? किसी  के  लिए  100    में  80 अच्छा  हो  सकता  है  किसी  के  लिए  100   में  60 भी  अच्छा  हो  सकता  है .
इसी  तरह  कई  लोग  कहते  हैं  कि  मेरा  लक्ष्य  है  एक  सफल  आदमी  बनना . पर  जब  आप  उनसे  पूछेंगे  की  किस  क्षेत्र  में  तो  शायद  वो  कोई  satisfactory answer ना  दे  पाएं . यानि  वो  अपने  लक्ष्य  को  लेकर  clear नहीं  हैं , और  जब  goal clear ना  हो  तो  उसके  achieve होने  की  बात  ही  नहीं  उठती .
2)      Measurable : आपका goal ऐसा  होना  चाहिए  जिसे  किसी  पैमाने  पर  मापा  जा  सके . यानि  उस  goal के  साथ  कोई  संख्या  कोई  number जुड़ा  होना  चाहिए . For example, यदि  कोई  कहता  है  की  उसका  लक्ष्य  weight कम  करना  है  तो  सवाल  उठता  है  की  कितना  कम  करना  है . Goal के  साथ  जब  numbers जुड़  जाते  हैं  तो  आप  अपनी  progress को  measure कर  सकते  हैं . और  ये  जान  सकते  हैं  की  आपने  अपना लक्ष्य  सही  तरह से  achieve किया  की  नहीं . इसलिए  एक  अच्छा  goal हमेशा  measurable होता  है .
3)      Achievable: यदि  आप  कोई  ऐसा  goal बनाएँगे  जो  अन्दर  से  आपको  ऐसी  feeling दे  कि  भाई  ये  तो  impossible है  तो  ऐसे  goal का  कोई  अर्थ  नहीं  है . दोस्तों  हमारा  sub-conscious mind conscious mind से   कहीं   अधिक  powerful होता  है ,यदि  आप  conscious mind से  कोई  impossible goal बनायेंगे  और  subconscious उसे  support नहीं  करेगा  तो  आपके  goal पूरा  होने  के  chances नहीं  के  बराबर  होंगे . For example. आप  decide करते  हैं  कि  मुझे  Maths में  100 number लाने  हैं  और  आपका  past record बताता  है  कि  आप  मुश्किल  से  ही  इस  subject में  पास  होते  हैं  तो  तुरंत  ही  आपका  अवचेतन  मस्तिष्क  इसे  नकार  देगा  और  आप  ये  goal achieve नहीं  कर  पाएंगे . वहीँ   अगर  आप  75% marks लाने  की  सोचते  हैं  तो  आपके  सफल  होने  की  संभावना  कहीं  अधिक  होगी .
4)      Realistic: आपका  goal आपके  लिए  realistic होना  चाहिए . Achievable और  Realistic के  बीच  एक  thin line है . जो लक्ष्य  realistic है वो  achievable हो सकता है, पर जो achievable है वो realistic भी हो ऐसा ज़रूरी नहीं है. For एक्साम्प्ले, Exam में  top करना  एक  achievable goal है , पर  यदि  आपने  शुरू  से  पढ़ाई  नहीं  की  है  और  अब  बस  exam में  कुछ ही दिन बचे  हैं  तो  ये  unrealistic होगा  की  आप  top करेंगे .हमेशा  अपनी  capacity के  हिसाब  से  realistic goals बनाएं . ये  भी  ध्यान  रकेहें  की  कोई  काम किसी  और  के  लिए  realistic हो  सकता  है  पर  आपको  उसे  अपने  angle से  देखना  है  और  अपने  goals design करने  हैं .
5)       Time-Bound : Goals के  साथ  अगर  आप  समय  सीमा  नहीं  निर्धारित  करेंगे  तो  आपको  उसे  achieve करने  की  urgency नहीं  महसूस  होगी  और  आप  उसे  पूरा  करने  के  लिए  सही  प्रयत्न  नहीं  कर  पायेंगे . इसीलिए  goal decide करते  वक़्त  ये  निश्चय  करना  कि  इसे  कब  तक  achieve करना  है  बहुत  ही  आवश्यक  है . मैंने  कई  बार  लोगों  को  ये  कहते  सुना  है  कि  मुझे  business start करना  है , पर  ये  बहुत  कम  ही सुनने  में  आता  है  कि  मुझे  इस  साल  के  इस  महीने  से  business start करना  है . अतः  आप  जब  भी  अपना  goal बनाएं  तो  उसे  कब  तक  achieve करना  है  ये  ध्यान में  रखें  और  उसे  अपनी  सोच का  हिस्सा  बनाएं , ऐसा  करने  से  कहीं  ना  कहीं  Law of Attraction भी  आपको  goals achieve  करने  में  help करेगा .
तो  यदि  हम  अपने  शुरआती  प्रश्न  पर  लौटें  तो  हम  पायेंगे  की  अधिकतर  cases में  “मुझे  Annual exam में  Maths में  कम  से  कम  80 number लाने  हैं ”  एक  SMART goal होगा . अगर   “मुझे  Annual exam में  Maths में 100 number लाने  हैं ”  लक्ष्य  की  बात  करें  तो  ये  ज्यादातर   लोगों के  लिए  या  तो  achievable नहीं  होगा  या  realistic नहीं  होगा , पर  कुछ  लोगों  के  लिए  जो  Maths में  exceptionally good हैं  उनके  लिए  ये  एक  SMART goal हो  सकता  है . पर  ऐसी  प्रजाति  बहुत  कम  ही  पायी  जाती  है. :)
SMART goal बना  लेना  मतलब  आधी जंग जीतना है , और  ना  बना  पाना हारना . बाकी  आधी  जीत  के  लिए  आपको  ये  plan करना  होगा  की  आप  कैसे  इस  goal को  achieve करेंगे  …इस  बारे में  फिर  कभी  बात  होगी …Thanks. :)

आपकी Success Diary


 

आपकी  Success Diary
Friends, 
मैं  अपनी  इस  diary को  कहता  हूँ …. “My Success Diary” ….यह  नाम  इसलिए  क्योंकि  इस  diary का  और  Success पाने  के  लिए  मेरे  efforts  का  सीधा  सम्बन्ध  है .  मैं  अपनी  life में  जो  कुछ  भी  करना  चाहता  हूँ , जिस  तरह  से  करना  चाहता  हूँ , जिस  समय  करना  चाहता  हूँ  वो  सब  इसमें  लिखा  हुआ  है ….और  ऐसा  नहीं  है  कि  मैंने   एक  बार  यह  सब  लिखा  और  इसे  आलमारी  में  सजा  कर  रख  दिया ….मैं  लगभग  हर  दूसरे  दिन  इसमें  अपनी  thoughts, अपनी  intentions और  अपनी  progress लिखता  हूँ .मैं  इसमें  सिर्फ  ये  नहीं  लिखता  कि  मुझे  क्या  पाना  है ; मुझे  जो  पाना  है  उसे  already पाया  हुआ  मान  कर  अपनी  feelings लिखता  हूँ , अपनी  ख़ुशी  को  व्यक्त  करता  हूँ .
जब कभी मैं पिछले पन्नो को पलटकर देखता हूँ तो मुझे भी अचरज होता है कि  मैंने  अपने  सपनो  को  लेकर ऐसी  कई  बातें  लिखी  थी  जो  आगे  चलकर  शब्दश:  सच  हुईं  हैं . इनमे  से  ज्यादातर  मेरी  job और  मेरी  wife  के  सपनो  को  लेकर  भी . For example: 
क्या  होता  है  जब  आप  diary लिखते  हैं ?
1)      अपने  goals को  लेकर  आपकी  खुद  की  clarity बढती  है . Written goals Unwritten goals से  कहीं  जयादा   powerful होते  हैं .
2)      आप  जाने अनजाने  Law of Attraction को  अपने  favour में  इस्तेमाल  करते  हैं . बार -बार  एक  ही  चीज  को  achieve करते  हुए  imagine करने  से  उसके  हकीकत  बनने  के  chances कहीं  अधिक  बढ़  जाते  हैं.
 3)      अपने  goal को  लेकर  आपका  focus बना  रहता है  और  ऐसे  लक्ष्य  जिसे  subconscious mind शुरू  में  नहीं  accept कर  पाता  धीरे -धीरे   उसमे  यकीन  करने  लगता  है .
किसे  बनानी  चाहिए  Success Diary?
हर  उस  व्यक्ति  को  जिसने  अपने  लिए  कोई  लक्ष्य  बना  रखा  हो . Engineer, Doctor, IAS officer,Fashion Designer,Actor etc  बनने  का  goal संजोने  वाले  students को , अपना  business start करने  का  सपना  देखने  वाले  individuals को , अपने  काम  को  नयी  बुलंदियों  तक  पहुचाने  का  सपना  देखने   वाले  कर्मवीरों को  .इसके आलावा यदि आपकी अपनी  fitness, health, personal relationships से सम्बंधित goals हैं तो भी आप Success Diary  बना सकते हैं.
और  यदि  आपका  अभी  तक  कोई  लक्ष्य  नहीं  है  तो  कृपया  यह  लेख  पढ़ें : “ जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है ?
कब  लिखें  Success Diary?
इसका  कोई  time  fix नहीं  है . जब  आपको  मौका  मिले  तब  लिखिए .  मैं  ज्यादातर  ये  काम  office के  खाली   समय  में  करता  हूँ . कब  लिखना  है , कहाँ  लिखना  है , कितना  लिखना  है  ….ये  मायने  नहीं  रखता .जो  मायने  रखता  है  वो  है  लिखना …यकीन  जानिये  आप  अपने  goals को  achieve करने  के  बारे  में  जितना अधिक सोचते-लिखते  हैं  उतना  उसके  करीब  पहुचते  हैं .
और हाँ, अगर आप हाथ से नहीं लिखना चाहते हैं तो  Word File को भी as a Success Diary बना सकते हैं.
मेरी डायरी में लिखी कुछ lines
क्या Success Diary (SD) लिखना  सफलता  की  guaranty है ?
नहीं , ज़रूरी  नहीं  है  कि  diary लिख  कर  भी  आप  100% अपने  goal को  achieve कर  ही  पाएं …पर  इतना  ज़रूर  है  कि  आपके  सफल  होने  के  chances बढ़  जायेंगे . Definitely बहुत  कुछ  आपके  actions पर  depend करेगा , और  जब  आप  SD लिखेंगे  तो  ये  आपको  उस  दिशा  में  steps लेने  के  लिए  प्रेरित  करेगी , इस  तरह  आपकी  success rate बढ़  जाएगी .
यह  भी  ध्यान  दें  कि  आप  SD को  basically Long term goals के  लिए  use करें , ऐसे  goals जिन्हें achieve करने  के  लिए आपके  पास  कम  से  कम  2-4 महीने  का  time हो . यदि  कल  आपका  test है  और  आज  आप  उसमे  highest marks पाने  के  बारे  में  लिखते  हैं  तो  इसका  कोई ख़ास मतलब नहीं  है …वहीँ  आप  6 महीने  बाद  होने  वाले  exam में  top करने  के  बारे में  लिखना  शुरू  करते  हैं  तो  यह  ज़रूर  काम  करेगा .
SD लिखने  में  क्या  challenges आ  सकते  हैं ?
सबसे  बड़ा  challenge इसमें  believe करने  का  है . चूँकि  बचपन  से  आपने  इस  तरह  goals को  लिखकर  उसे  achieve करने  के  बारे  में  नहीं  सुना  या  practice किया  इसलिए  आप  doubt कर  सकते  हैं  कि  ये  काम  करेगा  भी  या  नहीं ? पर  मेरा  विश्वास  कीजिये  ये  काम  करेगा . मैं ऐसे लोग जो इस लेख को पढ़ रहे हैं और उन्होंने भी इस technique से कोई लक्ष्य प्राप्त किया हो उनसे request करूँगा कि अपने कमेंट्स से अपना अनुभव हमें बताएं.
दूसरा challenge  हो  सकता  है  कि  आप  इसे  लिखने  की  शुरआत  जोर -शोर  से  करें  और  फिर  कुछ  दिन  बाद  ये  आपके  mind space से  गायब  ही  हो  जाए .  आपको  intentionally इसे  लिखना  है …..may be कुछ  gaps आ  जाएं …हो  सकता  है  एक -आध  हफ्ते  आप  इसे  बिलकुल  भूल  ही  जाएं …पर  हर  बार  आपको  इसे  फिर  से  लिखना  शुरू  करना  होगा , तभी  आपको  इसका  result मिल  पायेगा .
एक  और  challenge आ सकता  है  कि  SD में  लिखें  क्या ? इसका  सीधा  अर्थ  ये  होगा  कि  आप  अपने  goals को  लेकर  clear नहीं  हैं , इसलिए पहले  अपने  goals बनाएं , जल्दबाजी  में  नहीं  सोच -समझकर SMART goals बनाएं .
Success Diary (SD) Vs Personal Diary (PD)
Friends, आपने  personal diary के  बारे  में  ज़रूर  सुना  होगा , और  हो  सकता  है  कि  आपने  PD बनायीं भी  हो . पर  SD और  PD में  बहुत  अंतर  है . PD में  आप  अपनी  रोज़मर्रा  की  ज़िन्दगी  और  घटनाक्रम  के  बारे  में  लिखते  हैं , वो  किसी  एक चीज  को  लेकर  नहीं  होती ,…उसमे  आप  कुछ  भी  कहीं  से  उठाकर  लिख  सकते  हैं ….पर  SD का  दायरा  बहुत  छोटा  है . वह  आपके  goals को  achieve करने  के  लिए  है …आपको  success दिलाने  के  लिए  है . इसलिए  अपनी  SD को  PD से  mix मत  करिए .  हाँ , यदि  आप  PD लिखने  के  habitual हैं  तो  उसे  जारी  रखिये  मगर  SD के  लिए  एक  नयी  diary बनाइये  और  उसमे  रेगुलरली  लिखिए .
मैं  इस  बात  में  यकीन  नहीं  रखता  कि  नियम  से  हर  रोज़  diary में  लिखना  ही  लिखना  है ..ऐसा  करने  से  एक  बेकार  का  pressure feel होता  है , इसलिए  मुझे  जब  मन  होता  है  तब  मैं  अपनी  SD में  लिखता  हूँ , on an average three times a week.
आप  इस  बात  का  भी  ध्यान  रखें  कि  आप  किसी  copy,loose pages के  bundle,etc को  SD का  नाम  ना  दें . बेहतर  होगा  कि  आप  कोई  नयी  diary खरीदें  या  घर  में  रखी  किसी  fresh diary को use करें .  आखिर  इसमें  आपके  सफलता  की  गाथा  लिखी  जानी  है , वो भी आप ही के हाथों …इसे  अच्छा  तो  होना  ही  चाहिए . :)
Friends इस  article को  पढने  के  बाद  आपके  पास  दो  options हैं :
आप  इसे  uneffective समझ  कर  भूल  जाएं  या  आप  अपनी  Success Dairy बना  कर  अपनी  success story लिखना  शुरू  कर  दें . All the best for “Your Success Diary”!
                                                      ————————————-

कैसे बनाएं अपना दिन productive?


 “ मेरा  आज  का  सबसे  ज़रूरी  काम  क्या  है ?” 
और आप जैसे ही इस question का answer जान  लें  तो  आपको  इसी  को  अपना आज का लक्ष्य बना  लेना  है .  अब  आपको निश्चय करना  है कि कुछ  भी  हो  जाए  आप  आज ये  काम  केरेंगे  ही  करेंगे , ये  आपका  खुद   से  किया गया  commitment है .
Friends, शायद आपने भी experience किया होगा कि  जब  हमारे  सामने  बहुत  सारे  काम  होते  हैं  तो  कई  बार  ऐसा  होता  है  कि  हम   कुछ  काम  तो  निपटा  लेते  हैं  पर  कोई  ऐसा  काम  जो  और  सबसे  अधिक  ज़रूरी  था  वो  रह  जाता  है . पर  जब  आप किसी दिन का  MIT decide कर  लेते  हैं  तो   आपका  focus उस  एक  most important task पर  हो  जाता है  , और  आप  अन्य less important tasks को  side में  रख  पाते हैं.
अपने  MIT को   जितना  जल्दी  हो  सके  उतना  जल्दी  निपटाने  की   कोशिश  कीजिये , सबसे  अच्छा  तो  होगा  की  आप  अगले  दिन  के  MIT के  बारे  में  रात  में  ही  सोच  लें  और  अगले  दिन  उठने  के  बाद  जितना  जल्दी  हो  सके  इस  काम  को  ख़त्म  करने  की  कोशिश  करें  . काम  complete होने  पर  आप  बहुत  relax हो  जायेंगे आपको लगेगा की आपने  वो  achieve कर  लिया  है जिसे पूरा करने का आपने निश्चय किया था. और अब  आप  बचे  हुए  कामों  को  prioritize कर  के  निपटा  सकते  हैं .
ये  ज़रूरी  नहीं  की  MIT कोई  बहुत  hi-fi काम  हो , ये  छोटा  से  छोटा  और   बड़ा  से  बड़ा  काम  हो  सकता  है , बस  ख़ास  बात  ये  है  की  उस  particular day पर  यही  आपका  सबसे  ज़रूरी  काम  होगा .जैसे कि किसी  के  लिए  कोई  college assignment complete करना  MIT हो  सकता  है  तो  किसी  के  लिए  शादी  का  card बांटना  MIT हो  सकता  है , तो  किसी  और  के  लिए  sales presentation बनाना  MIT हो  सकता  है!!
अगर मैं अपने आज के MIT की बात  करूँ तो हो सकता है ये आपको बहुत ही साधारण काम लगे पर सच बताऊँ तो इसे कर के मैं बहुत ही relaxed और अच्छा  feel कर रहा हूँ. :)   दरअसल मैं  पिछले  कई  दिनों  से  अपने  scooty का  engine oil change कराने  की  सोच  रहा  था ….पर  किसी  ना  किसी  वजह  से  ये  काम  रह  जाता  था …पर  मैंने  इसे  आज  अपना  MIT बनाया …और  office जाते  वक़्त ही  इसे  complete किया . अगर  मैं  इसे  MIT नहीं  बनाता  तो  और  दिनों  की  तरह  आज  भी  मैं  यही  सोचता  कि  चलो …ऑफिस से लौटते  वक़्त या  कल  ये  काम  करा  लेंगे …और  फिर  वो  काम  रह  जाता .
Actually जब  आप  किसी  काम  को  MIT बनाते  हैं  तो  आपके  पास  उस  काम   को  करने  के  लिए अलग  से  एक  energy और  motivation मिल  जाता  है  और   task complete हो  जाता  है .
जब  आप  कई  दिनों  तक  लगातार  अपने  MIT complete कर  लेंगे  तो  आपको  इसकी  आदत  पड़ जाएगी , और  फिर  आप  MIT को  थोडा  modify करके  MITs ( Most Important Tasks) कर  सकते  हैं , यानी  अब  आपको खुद को stretch करना है और  किसी  particular day पर  एक  से  अधिक  काम  complete करने  हैं .
To begin with आप  अपने  लिए  कोई  दो  काम  चुनिए , ये  भी  ध्यान  रखिये  की  आपकी  MITs की  list manageable हो  , यदि  आप  दस  कामों  को  MITs list में  डाल  देंगे  तो  शायद  ये  पूरी  exercise बेकार चली  जाये …मेरे  हिसाब  से  आप  maximum 3 कामों  को  ही  MITs में  रखिये .और   इन  तीन  tasks में  से  कम  से  कम  एक  task ऐसा  होना  चाहिए  जो  आपके LONG TERM GOALS को  fulfil करने  में  helpful हो . ऐसा  करने  से  आप  daily अपने  goal की  तरफ  बढ़ते   रहेंगे   और  at the end of the day satisfied feel करेंगे .
So, give it a try. All the best!

निराशा से निकलने और खुद को motivate करने के 16 तरीके


16 ways to motivate yourself
दोस्तों कई बार ऐसा होता है कि हम भले ही बड़े motivation के साथ कोई काम शुरू करें पर किन्ही कारणों से कुछ समय बाद हम अपना motivation lose कर देते हैं, और वापस track पर आना मुश्किल लगने लगता है. आज  मैं आपके साथ ऐसी ही state से बाहर निकलने के 16 तरीके share कर रहा हूँ. 

 निराशा से निकलने और खुद को motivate करने के 16 तरीके 

 हममें से सबसे अधिक motivated लोग भी- आप,मैं, Tony Robbins (a self-help expert like Shiv Khera) – कभी -कभार demotivated feel कर सकते हैं. यहाँ तक की , कभी-कभी हम इतना low feel कर सकते हैं  कि positive बदलाव के बारे में सोचना भी बहुत कठिन लगने लगता है.
पर ये निराशाजनक नहीं है: छोटे छोटे steps लेकर आप सकारात्मक बदलाव के रास्ते पर वापस आ सकते हैं.
हाँ , मैं जानता हूँ, कभी कभी ये असंभव लगता है. आपको कुछ करने का मन नहीं करता. मेरे साथ भी ये हुआ है,दरअसल अभी भी समय समय पर मैं ऐसा feel करता हूँ. आप अकेले नहीं हैं . लेकिन मैंने इस निराशा से बाहर निकलने के कुछ तरीके सीख लिए हैं, और हम आज उन्ही पर नज़र डालेंगे.
जब बीमारी , चोट या life में चल रही किसी और समस्या के कारण में व्यायाम नहीं कर पाता तो उसे वापस से शुरू करना कठिन होता है. कई बार, मैं उसके बारे में सोचना भी नहीं चाहता . लेकिन मैं हमेशा उस  feeling से उबरने का कोई ना कोई रास्ता निकाल लेता हूँ, और यहाँ ऐसी ही कुछ बाते हैं जो मेरे लिए मददगार साबित होती हैं.
 1. One Goal  एक लक्ष्य
जब भी मैं  थोडा down हुआ हूँ , मैंने पाया है कि अक्सर ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मेरी life में एक साथ बहुत कुछ चल रहा होता है. मैं बहुत कुछ करने की कोशिश कर रहा होता हूँ. और ये मेरी energy और motivation को ख़तम कर देता है. शायद ये सबसे common mistake है जो लोग करते हैं: वो एक साथ बहुत कुछ करने की कोशिश करते हैं. यदि एक समय में दो या उससे अधिक लक्ष्य achieve करने का प्रयास करते हैं तो आप अपनी  ( लक्ष्य पाने के लिए दो सबसे महत्त्वपूर्ण चीजें ) energy और focus बनाये नहीं रख पाते.  ये संभव नहीं है – मैंने कई बार कोशिश की है. आपको अभी के लिए कोई एक लक्ष्य चुनना होगा, और पूरी तरह से उसपर focus करना होगा. मुझे पाता है ये कठिन है, पर मैं अपने experience से बता रहा हूँ. एक बार आप अपना अभी का निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर लें फिर उसके बाद आप अपने बाकी लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं.
2. Find Inspiration प्रेरणा खोजिये
मुझे उन लोगों से प्रेरणा मिलती है जिन लोगों already वो achieve कर लिया है जो मैं करना चाहता हूँ, या वो लोग जो वही कर रहे हैं जो मैं करना चाहता हूँ. मैं औरों के blogs, books,magazines पढता हूँ. मैं अपने goals को Google करता हूँ , और success stories पढता हूँ.  Zen Habits ऐसी ही जगहों में से एक है, सिर्फ मुझसे ही नहीं बल्कि अन्य कई readers से जिन्होंने अद्भुत चीजें प्राप्त की हैं.
3. Get Excited उत्साहित होइए
ये सुनने में बहुत obvious सी बात लगती है, पर ज्यादातर लोग इस बारे में अधिक नहीं  सोचते हैं: अगर आप निराशा से निकलना चाहते हैं, तो किसी लक्ष्य के लिए उत्साहित हो जाइये. पर अगर आप motivated नहीं feel करते हैं तो आप excited कैसे feel करेंगे? Well, इसकी शुरुआत दूसरों से प्रेरणा लेकर होती है, लेकिन आपको दूसरों से उत्साह लेकर उसे अपनी उर्जा में बदलना होगा.मैंने पाया है कि  मैं अपनी wife और अन्य लोगों से बात करके, इस बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़कर, और इसे  visualize (दिमाग  में  goal achieve करने से होने वाले फायदे को देखना ) करके कि  successful होना कैसा लगेगा, excited feel करने लगता हूँ. एक बार ये कर लिया तो बस इसी energy को आगे carry करने और आगे बढ़ने की ज़रुरत रहती है.
4.Build Anticipation अपेक्षा करें
ये सुनने में कुछ कठिन लग सकता है, और अकी लोग इस tip को skip कर देंगे. लेकिन ये सचमुच काम करती है. कई बार असफल प्रयासों के बाद इसी टिप की वजह से मैं cigarette पीना छोड़ पाया.अगर आपको अपना goal achieve करने की प्रेरणा मिल जाती है तो  तुरंत उसे प्राप्त करने का प्रयास ना करें. हममें से कई लोग excited होके आज ही अपना काम शुरू करना चाहेंगे. ये एक गलती है. Future की कोई date set कीजिये – एक या दो हफ्ते बाद , या एक महीना भी  – और उसे अपनी Start Date बनाइये. उसे कैलेण्डर पर mark कर लीजिये. उस date को लेकर उत्साहित होइए. उसे अपने जीवन की  सबसे important date बना लीजिये. इस बीच अपना प्लान बनाइये. और नीचे दिए गए कुछ steps follow कीजिये. क्योंकि अपनी start delay करके आप anticipation build करते हैं और अपने लक्ष्य के प्रति अपनी उर्जा और ध्यान बढाते हैं.
5. Post your goal  अपना लक्ष्य प्रकाशित करें
अपने goal का एक बड़ा सा print निकाल लें. अपना लक्ष्य कुछ ही शब्दों में लिखें , जैसे कोई मन्त्र  (“Exercise 15 mins. Daily”), और उसे अपने दीवार या फ्रिज पर चिपका दें. इसे अपने घर में अपने office में लगा लें उसे अपने computer के desktop पर लगा लें. आप अपने goals के लिए बड़े reminders लगाना चाहते हैं , ताकि  आप अपने goal पर focus कर पाएं और उसे लेकर excited रह पाएं. अपने goal से सम्बंधित कोई picture लगाना भी  helpful हो सकता है  (like a model with sexy abs, for example).
6.Commit Publicly सार्वजनिक रूप से प्रतिज्ञा लीजिये 
कोई भी दूसरों के सामने बुरा नहीं दिखना चाहता है . जो बात हमने publicly कही है उसे करने के लिए हम extra effort करते हैं. For example, जब मैं अपनी पहली मैराथन दौड़ दौड़ना चाहता था , तब मैंने अपने  local newspaper में इस बारे में एक column लिखना शुरू कर दिया. Guam की पूरी आबादी मेरे इस goal के बारे में जान गयी. अब मैं पीछे नहीं हट सकता था , हालांकि मेरी motivation कम -ज्यादा होती रही पर मैं इस goal को पकडे रहा और दौड़ complete की.आपको किसी newspaper में अपना goal commit करने की ज़रुरत नहीं है , पर आप इसे अपने family,friends, और co-workers से बता सकते हैं, और यदि आपका कोई blog है तो उसपर भी इस बारे में लिख सकते हैं.और खुद को जिम्मेदार ठेराइये – केवल एक बार commit मत करिए , बल्कि अपने progress के बारे में सभी को हर हफ्ते या महीने update करने के लिए भी commit करिए.
7. Think about it daily इस बारे में रोज़ सोचिये
यदि आप रोज़ अपने लक्ष्य के बारे में सोचते हैं तो उसके पूर्ण होने की संभावना कहीं अधिक है. इसीलिए अपने लक्ष्य को दीवार पर या desktop पर लगाना मददगार होता है . हर रोज़ खुद को reminder भेजना भी helpful होता है. और अगर आप रोज बस पांच मिनट भी ये छोटा सा काम करेंगे तो ये लगभग तय है की आपका लक्ष्य पूर्ण होगा.
8. Get Support.  मदद लीजिये
अकेले कुछ हांसिल करना कठिन होता है. जब मैंने मैराथन में दौड़ने का निश्चय किया था , तो मेरे साथ दोस्तों और परिवार का support था, और साथ ही Guam में दौड़ने वालों की एक अच्छी community भी थी  जो मेरे साथ दौड़ते थे और मुझे encourage करते थे. जब मैंने smoking quit करनी चाही तो मैंने एक online forum join कर लिया , जो मेरे लिए बहुत helpful रहा. और इस काम में मेरी wife Eva  ने हर कदम पर मेरा साथ दिया. मैं उसकी और अन्य लोगों की मदद के बिना ऐसा नहीं कर पाता. अपना support network खोजिये , अपने आस-पास  या online या दोनों जगह.
9. Realize that there’s an ebb and flow इस बात को समझिये की उतार-चढ़ाव आते रहते हैं
Motivation कोई ऐसी चीज नहीं है जो हमेशा आपके साथ रहे. ये आती है , जाती है और फिर आती है, ज्वार की तरह . इस बात को समझिये की भले ही ये चली जाए , पर वो हमेशा के लिए नहीं चली जाती . Motivation वापस आती है.  बस अपने लक्ष्य से जुड़े रहिये और motivation के वापस आने का इंतज़ार कीजिय. इस दौरान अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , दूसरों से मदद मांगिये , और यहाँ बताई अन्य  कुछ चीजें कीजिये जब तक की आप का motivation वापस ना आ जाये.
10. Stick with it. लगे रहिये
आप चाहे जो कुछ भी करिए , पर हार नहीं मानिए. भले आप आज या इस हफ्ते बिलकुल  ही motivated ना feel कर रहे हों , पर अपना लक्ष्य छोड़िये नहीं. आपकी motivation फिर वापस आएगी . अपने लक्ष्य को एक लम्बी यात्रा की तरह देखिये , और बीच में जो demotivation  आता है वो महज़ एक speed-breaker है. छोटी मोती बाधाएं आने पर  आप यात्रा नहीं छोड़ते. लम्बे समय तक अपने लक्ष्य के साथ जुड़े रहिये , उतार-चढ़ाव पार कीजिये और आप वहां पहुँच जायेंगे.
11.Start small. Really small छोटे, बहुत छोटे से शुरुआत कीजिये
अगर आपको शुरुआत करने में दिक्कत  हो  रही है तो शायद इसकी वजह ये है की आप बहुत बड़ा सोच रहे हैं. यदि आप व्यायाम करना चाहता हैं, तो शायद आप सोच रहे हों की हफ्ते में पांच दिन intensely workout करना है. नहीं – इसकी जगह छोटे-छोटे baby steps लीजिये. सिर्फ दो मिनट व्यायाम कीजिये. मुझे पता है ये आपको अटपटा लग रहा होगा. ये इतना आसान है, आप fail नहीं हो सकते. पर आप इसे करिए . बस कुछ crunches, 2 pushups, और वहीँ थोड़ी सी jogging. जब आपने एक हफ्ते तक ये २ मिनट तक कर लेंगे , तो इसे बढाकर पांच मिनट कर दीजिये , और एक हफ्ते तक इसे कीजिये. एक महीने में आप 15-20 मिनट करने लगेंगे. सुबह जल्दी उठाना चाहते हैं ? सुबह पांच बजे उठने का मत सोचिये, इसकी जगह आप एक हफ्ते तक बस 10 मिनट पहले उठिए . एक बार आपने ये कर लिया , तो 10 मिनट और जल्दी उठिए. Baby Steps.
12.Build on small successes छोटी छोटी उपलब्धियों के साथ आगे बढिए
एक बार फिर , अगर आप एक हफ्ते तक छोटे लक्ष्य के साथ शुरू करेंगे तो आप सफल होंगे. अगर किसी बेहद आसान चीज से शुरुआत करेंगे तो आप fail नहीं हो सकते. भला कौन दो मिनट तक exercise नहीं कर सकता? ( यदि आप वो हैं, तो मैं माफ़ी मांगता हूँ) और आप successful feel करेंगे , आपको अन्दर से अच्छा लगेगा. इसी feeling के साथ और छोटे-छोटे steps लेते  जाइये . For example : अपनी exercise routine में दो-तीन मिनट add करिए. हर एक step के साथ (और हर स्टेप कम से कम एक हफ्ते चलना चाहिए), और आप और भी successful feel करेंगे. हर एक स्टेप बहुत बहुत छोटा रखिये और आप fail नहीं होंगे. दो महीने बाद , आपके छोटे छोटे कदम आपको बहुत सारी progress और success दिलाएंगे
13.Read about it daily. रोज़ इसके बारे में पढ़ें
जब मैं अपना motivation lose करता हूँ , मैं अपने लक्ष्य से सम्बंधित कोई किताब या ब्लॉग पढता हूँ. ये मुझे प्रेरित करता है और मुझे दृढ बनता है. किसी वजह से आप जो कुछ भी पढ़ते हैं वो आपको उस विषय में प्रेरित करता है और आपका ध्यान केन्द्रित करने में मदद करता है. इसलिए अगर आप पढ़ सकते हैं तो रोज़ अपने लक्ष्य के बारे में पढ़िए , खासतौर से तब जब आप motivated ना feel कर रहे हों.
14.Call for help when your motivation ebbs  जब प्रेरणा कम हो तब मदद मांगिये
समस्या है? मदद मांगिये. मुझे email करिए. कोई online forum join करिए. अपने लिए कोई partner खोजिये. अपनी माँ को call कीजिये. इससे मतलब नहीं है की सामने वाला कौन है , बस अपनी समस्या बताइए , इस बारे में बात करना आपके लिए helpful होगा. उनकी advice मांगिये . उनसे आपको demotivated state से निकालने के लिए मदद करने के लिए कहिये. ये काम करता है.
15.Think about the benefits, not the difficulties. फायदों के बारे में सोचिये परेशानियों के बारे में नहीं
एक common problem है कि हम ये सोचते हैं कि कोई चीज कितनी कठिन है . Exercise करना बहुत कठिन लगता है ! इसके बारे में सोचना ही आपको थका देता है.पर ये सोचना कि बजाये की कोई चीज कितनी कठिन है , ये सोचिये की उसके कितने फायदे हैं.   For Example, ये सोचने की  जगह कि  व्यायाम करना कितना कठिन है;आप ये सोचिये की ये करने के बाद आप कितना अच्छा feel करेंगे, और long run में आप कितने healthier और slimmer होंगे. किसी चीज के फायदे आपको energize कर देंगे.
16.Squash negative thoughts; replace them with positive ones. नकारात्मक विचारों को त्यागिये और उन्हें सकारात्मक विचारों से बदल दीजिये
अपने विचारों को monitor करना ज़रूरी है. आप जो negative self-talk करते हैं, जो दरअसल आपको demotivate कर रहा है  उसे पहचानिए. कुछ दिन बस ये जानने में बिताइए कि आपके अन्दर कौन कौन से नकारात्मक विचार हैं, और फिर कुछ दिनों  बाद उन्हें एक bug की तरह अपने अन्दर से निकालिए , और फिर उन्हें corresponding positive thought से replace कर दीजिये . अगर आप सोचते हैं कि ,” ये बहुत कठिन है” तो उसे ” मैं ये कर सकता हूँ” से बदल दीजिये . अगर वो Leo इसे कर सकता है , तो मैं भी! ये कुछ अटपटा सुने देता है , पर ये काम करता है. सचमुच.
 —————————————————————

दिल और दिमाग के बीच संबंध


क्या आप डिमेंशिया से बचना चाहते हैं? इसके लिए आपको अपने दिल को स्वस्थ रखना होगा। फ्रांस में सेंटर फॉर रिसर्च इन इपीडेमियोलॉजी एंड पोपुलेशन हेल्थ में भारतीय मूल की शोधकर्ता अर्चना सिंह ने पाया कि स्वस्थ हृदय डिमेंशिया को दूर रखने की एक प्रमुख कुंजी है।

बड़े पैमाने पर माना जाता है कि मस्तिष्क की याददाश्त, तर्क-विर्तक और समझबूझ की शक्ति कम से कम 60 साल की उम्र तक कम होना शुरू नहीं होती। बहरहाल शोधकर्ताओं का दावा है कि डिमेंशिया लोगों को समय से पहले अपना शिकार बना सकता है। यहां तक कि डॉक्टरों की मान्यता से 15 वर्ष पहले, 45 साल के व्यक्तियों में भी इसके लक्षण दिखना शुरू हो सकते हैं।

ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक बहरहाल पोषक पदार्थ खाकर दिल को स्वस्थ रखकर और नियमित व्यायाम से याददाश्त संबंधी समस्या को जल्द आने से रोका जा सकता है जो डिमेंशिया को कुछ हद तक दूर रखने में मददगार साबित हो सकता है। डिमेंशिया का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। शोधकर्ताओं का कहना है, ‘सर्वसम्मति से यह मान्यता उभरकर सामने आ रही है कि ‘जो हमारे हृदय के लिए अच्छा है वह मस्तिष्क के लिए भी अच्छा है।’ अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 45 से 70 आयुवर्ग के 7000 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों का अध्ययन किया।

पोषक पदार्थ खाकर व दिल को स्वस्थ रखकर और नियमित व्यायाम से याददाश्त संबंधी समस्या को जल्द आने से रोका जा सकता है।