मानव प्रकृति है कि वह हर उस चीज से दूर भागना चाहता है, जिससे उसे डर लगता है, जो उसे नापसंद होती है या जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित होती है। अपने अस्तित्व को खतरे में कौन डालना चाहता है?
दुश्चिन्ता का ही एक रूप आतंक अथवा अयथार्थ भय है। भय स्वयंभी चिंता का कारण होता है। साधारण भय और भय रोग (फोबिया) में यह अंतर है। खतरे की स्थिति में जो शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रिया होती है वह तो सचमुच का भय है। जबकि भय की अनुभूति अथवा काल्पनिक कारणों से भयभीत होना भय रोग कहलाता है।
अनेक प्रकार के अयथार्थ भय पाए जाते हैं जैसे खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया), ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया), बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया), अँधेरे का भय (निक्टो फोबिया), गंदगी का भय (माइसो फोबिया)।
खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया) :
कभी-कभी कई बार हमें कुछ व्यक्ति यह कहते हुए मिल जाते हैं कि उन्हें खुले स्थान में जाने से डर लगता है। वह व्यक्ति खुले स्थान में अकेले नहीं रह सकता। इस प्रकार का डर ही एगोरा फोबिया कहलाता है। इसमें व्यक्ति बाहर अकेले जाने से या खुले में जाने से डरता है।
ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया) :
इसके अंतर्गत व्यक्ति ऊँचाई पर जाने से डरता है। घबराहट होती है, चक्कर आते हैं, उसे ऐसा लगता है कि वह ऊँचाई पर पहुँचते ही गिर जाएगा या उसे कुछ हो जाएगा। कई बार जब यह डर व्यक्ति के गहराई में पहुँच जाता है तो वह बेहोश भी हो जाता है।
बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया) :
कुछ लोगों को बंद स्थान का भय लगता है। बंद स्थान के भय से आशय है उसमें व्यक्ति को लगता है कि अगर वह बंद कमरे में रहता है या रहेगा तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी। वह चाहता है कि वह हर वक्त खुले स्थान में रहे। अगर वह कमरे में भी है तो वह चाहता है कि सारे दरवाजे, खिड़कियाँ खोल दे ताकि अंदर हवा आती रहे। अगर दरवाजे-खिड़कियाँ बंद हो जाएँगे तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी।
मानव प्रकृति है कि वह हर उस चीज से दूर भागना चाहता है, जिससे उसे डर लगता है, जो उसे नापसंद होती है या जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित होती है। अपने अस्तित्व को खतरे में कौन डालना चाहता है?
दुश्चिन्ता का ही एक रूप आतंक अथवा अयथार्थ भय है। भय स्वयंभी चिंता का कारण होता है। साधारण भय और भय रोग (फोबिया) में यह अंतर है। खतरे की स्थिति में जो शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रिया होती है वह तो सचमुच का भय है। जबकि भय की अनुभूति अथवा काल्पनिक कारणों से भयभीत होना भय रोग कहलाता है।
अनेक प्रकार के अयथार्थ भय पाए जाते हैं जैसे खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया), ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया), बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया), अँधेरे का भय (निक्टो फोबिया), गंदगी का भय (माइसो फोबिया)।
खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया) :
कभी-कभी कई बार हमें कुछ व्यक्ति यह कहते हुए मिल जाते हैं कि उन्हें खुले स्थान में जाने से डर लगता है। वह व्यक्ति खुले स्थान में अकेले नहीं रह सकता। इस प्रकार का डर ही एगोरा फोबिया कहलाता है। इसमें व्यक्ति बाहर अकेले जाने से या खुले में जाने से डरता है।
ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया) :
इसके अंतर्गत व्यक्ति ऊँचाई पर जाने से डरता है। घबराहट होती है, चक्कर आते हैं, उसे ऐसा लगता है कि वह ऊँचाई पर पहुँचते ही गिर जाएगा या उसे कुछ हो जाएगा। कई बार जब यह डर व्यक्ति के गहराई में पहुँच जाता है तो वह बेहोश भी हो जाता है।
बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया) :
कुछ लोगों को बंद स्थान का भय लगता है। बंद स्थान के भय से आशय है उसमें व्यक्ति को लगता है कि अगर वह बंद कमरे में रहता है या रहेगा तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी। वह चाहता है कि वह हर वक्त खुले स्थान में रहे। अगर वह कमरे में भी है तो वह चाहता है कि सारे दरवाजे, खिड़कियाँ खोल दे ताकि अंदर हवा आती रहे। अगर दरवाजे-खिड़कियाँ बंद हो जाएँगे तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी।
दुश्चिन्ता का ही एक रूप आतंक अथवा अयथार्थ भय है। भय स्वयंभी चिंता का कारण होता है। साधारण भय और भय रोग (फोबिया) में यह अंतर है। खतरे की स्थिति में जो शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रिया होती है वह तो सचमुच का भय है। जबकि भय की अनुभूति अथवा काल्पनिक कारणों से भयभीत होना भय रोग कहलाता है।
अनेक प्रकार के अयथार्थ भय पाए जाते हैं जैसे खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया), ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया), बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया), अँधेरे का भय (निक्टो फोबिया), गंदगी का भय (माइसो फोबिया)।
खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया) :
कभी-कभी कई बार हमें कुछ व्यक्ति यह कहते हुए मिल जाते हैं कि उन्हें खुले स्थान में जाने से डर लगता है। वह व्यक्ति खुले स्थान में अकेले नहीं रह सकता। इस प्रकार का डर ही एगोरा फोबिया कहलाता है। इसमें व्यक्ति बाहर अकेले जाने से या खुले में जाने से डरता है।
ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया) :
इसके अंतर्गत व्यक्ति ऊँचाई पर जाने से डरता है। घबराहट होती है, चक्कर आते हैं, उसे ऐसा लगता है कि वह ऊँचाई पर पहुँचते ही गिर जाएगा या उसे कुछ हो जाएगा। कई बार जब यह डर व्यक्ति के गहराई में पहुँच जाता है तो वह बेहोश भी हो जाता है।
बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया) :
कुछ लोगों को बंद स्थान का भय लगता है। बंद स्थान के भय से आशय है उसमें व्यक्ति को लगता है कि अगर वह बंद कमरे में रहता है या रहेगा तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी। वह चाहता है कि वह हर वक्त खुले स्थान में रहे। अगर वह कमरे में भी है तो वह चाहता है कि सारे दरवाजे, खिड़कियाँ खोल दे ताकि अंदर हवा आती रहे। अगर दरवाजे-खिड़कियाँ बंद हो जाएँगे तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी।
मानव प्रकृति है कि वह हर उस चीज से दूर भागना चाहता है, जिससे उसे डर लगता है, जो उसे नापसंद होती है या जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित होती है। अपने अस्तित्व को खतरे में कौन डालना चाहता है?
दुश्चिन्ता का ही एक रूप आतंक अथवा अयथार्थ भय है। भय स्वयंभी चिंता का कारण होता है। साधारण भय और भय रोग (फोबिया) में यह अंतर है। खतरे की स्थिति में जो शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रिया होती है वह तो सचमुच का भय है। जबकि भय की अनुभूति अथवा काल्पनिक कारणों से भयभीत होना भय रोग कहलाता है।
अनेक प्रकार के अयथार्थ भय पाए जाते हैं जैसे खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया), ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया), बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया), अँधेरे का भय (निक्टो फोबिया), गंदगी का भय (माइसो फोबिया)।
खुले स्थान का भय (एगोरा फोबिया) :
कभी-कभी कई बार हमें कुछ व्यक्ति यह कहते हुए मिल जाते हैं कि उन्हें खुले स्थान में जाने से डर लगता है। वह व्यक्ति खुले स्थान में अकेले नहीं रह सकता। इस प्रकार का डर ही एगोरा फोबिया कहलाता है। इसमें व्यक्ति बाहर अकेले जाने से या खुले में जाने से डरता है।
ऊँचाई का भय (एक्रो फोबिया) :
इसके अंतर्गत व्यक्ति ऊँचाई पर जाने से डरता है। घबराहट होती है, चक्कर आते हैं, उसे ऐसा लगता है कि वह ऊँचाई पर पहुँचते ही गिर जाएगा या उसे कुछ हो जाएगा। कई बार जब यह डर व्यक्ति के गहराई में पहुँच जाता है तो वह बेहोश भी हो जाता है।
बंद स्थान का भय (क्लास्ट्रो फोबिया) :
कुछ लोगों को बंद स्थान का भय लगता है। बंद स्थान के भय से आशय है उसमें व्यक्ति को लगता है कि अगर वह बंद कमरे में रहता है या रहेगा तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी। वह चाहता है कि वह हर वक्त खुले स्थान में रहे। अगर वह कमरे में भी है तो वह चाहता है कि सारे दरवाजे, खिड़कियाँ खोल दे ताकि अंदर हवा आती रहे। अगर दरवाजे-खिड़कियाँ बंद हो जाएँगे तो उसे घुटन होगी, घबराहट होगी।
No comments:
Post a Comment